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पूर्व टीटीडी चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी की ओर से दायर मानहानि याचिका पर 10 मार्च को होगी सुनवाई

वाईवाई सुब्बा रेड्डी और पत्नी ने तिरुपति लड्डू मिलावट मामले में मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि याचिका दायर की है.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के नेता और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व चेयरमैन वाईवी सुब्बा रेड्डी और उनकी पत्नी द्वारा तिरुपति लड्डू मिलावट मामले में मीडिया रिपोर्टिंग के खिलाफ दायर मानहानि याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 10 मार्च को सुनवाई करेगा. जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दयान कृष्णन ने अदालत को बताया कि तिरुपति लड्डू प्रसादम में मिलावट के आरोपों को लेकर मामला अत्यंत संवेदनशील है. रेड्डी की ओर से पेश वकील ने यह भी बताया कि चार्जशीट दाखिल होने और उनके खिलाफ आरोप सिद्ध न होने के बावजूद कुछ मीडिया प्रकाशनों और ऑनलाइन लेखों में उन्हें विवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. ये लेख सोशल मीडिया पर उपलब्ध है, और ट्विटर पर उनकी तस्वीरों के साथ प्रसारित किए जा रहे हैं. कृष्णन ने अदालत को बताया कि चूंकि तिरुपति के देवता के देशभर में अनुयायी हैं, इसलिए इन लेखों का प्रभाव दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी पड़ रहा है.

क्लीन चिट मिलने के बाद भी मीडिया पर निशाना

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी का गठन किया था. वकील ने कहा कि एसआईटी की जांच में रेड्डी को क्लीन चिट मिल चुकी है और वे इस मामले में आरोपी नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रेड्डी टीटीडी के चेयरमैन रहते हुए दैनिक प्रशासनिक कार्यों में सीधे तौर पर शमिल नहीं थे. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की थी कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था देवता से जुड़ी है, इसलिए इस मामले में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान एक व्यक्ति, जो पहले रेड्डी के निजी सहायक रह चुके थे, का नाम सामने आया. हालांकि कि संबंधित व्यक्ति उस समय उनका पीए नहीं था, जब कथित घटनाएं हुई.

मामले में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है. सुब्बा रेड्डी जून 2019 से अगस्त 2023 तक टीटीडी मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन थे. अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ प्रकाशित लेखों और पोस्ट ने भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के लिए घी की खरीद में अनियमितताओं का आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुचाया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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