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दयानिधि हाजिर हों..! मुजफ्फरपुर की कोर्ट ने DMK नेता को क्यों किया तलब?

क्या राजनीति में भाषाई और क्षेत्रीय नफरत की कोई सीमा नहीं बची है? DMK सांसद दयानिधि मारन ने उत्तर भारतीय महिलाओं को सिर्फ ‘खाना बनाने और बच्चे पैदा करने वाली’ बताकर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था. अब उन्हें इस मामले में बिहार के मुजफ्फरपुर की कोर्ट (Muzaffarpur Court) ने तलब किया है. जानिए क्या है पूरा मामला?

DMK Dayanidhi Maran Summoned By Muzaffarpur Court

उत्तर भारतीय महिलाओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में द्रमुक (DMK) सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन (Dayanidhi Maran) कानूनी पचड़े में फंस गए हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur Court) की अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (ACJM-1, पश्चिम) अदालत ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए मारन को समन जारी किया है. अदालत ने 13 फरवरी को रजिस्टर्ड डाक के जरिए समन भेजकर उन्हें 23 फरवरी 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है.

क्या कहा था दयानिधि मारन ने?

यह पूरा विवाद चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मारन द्वारा दिए गए एक बयान से शुरू हुआ था. आरोप है कि मारन ने हिंदी भाषी राज्यों और तमिलनाडु के बीच तुलना करते हुए कहा था कि उत्तर भारत की महिलाएं और लड़कियां केवल खाना बनाने और बच्चे पैदा करने तक सीमित हैं. इसके विपरीत उन्होंने तमिलनाडु की महिलाओं को शिक्षित और प्रगतिशील बताया था. इस बयान का वीडियो वायरल होने के बाद उत्तर भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी और इसे महिलाओं के सम्मान पर सीधा हमला माना गया.

ओझा ने दायर किया परिवाद

इस मामले को लेकर मुजफ्फरपुर के स्थानीय अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने अदालत का दरवाजा खटखटाया. ओझा का तर्क है कि एक सांसद का यह बयान न केवल उत्तर भारतीय महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि यह देश की एकता को खंडित कर क्षेत्रीय नफरत फैलाने की एक सोची-समझी साजिश है. उनका कहना है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को देश के किसी हिस्से का अपमान करने का अधिकार नहीं है.

BNS की इन धाराओं में दर्ज हुआ केस

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई सख्त धाराओं के तहत संज्ञान लिया है.

  • धारा 74, 75 और 79: महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और अपमान से संबंधित.
  • धारा 192 और 298: धार्मिक या क्षेत्रीय भावनाओं को आहत करना.
  • धारा 352 और 251(2): शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना.

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अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को देश के किसी हिस्से या वर्ग का अपमान करने का अधिकार नहीं है. अब सबकी नजरें 23 फरवरी 2026 की सुनवाई पर टिकी हैं, जब दयानिधि मारन को अदालत के समक्ष अपनी सफाई पेश करनी होगी. देखना होगा कि वो खुद पेश होते हैं या उनका वकील उनका जवाब पेश करता है.



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