शल्य चिकित्सा की जब भी बात होती है, तो पूरी दुनिया भारत के महान महर्षि आचार्य सुश्रुत के आगे नतमस्तक होती है. इसी प्राचीन और गौरवशाली शल्य परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने के लिए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. सुश्रुत जयंती के अवसर पर 14 से 17 जुलाई 2026 तक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सौश्रुतम्–2026’ का आयोजन होने जा रहा है. 15 जुलाई को भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु इस भव्य कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगी.
आयुर्वेदिक अस्पताल में पहली बार ‘रोबोटिक सर्जरी’
रोबोटिक सर्जरी, इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की सबसे बड़ी हाईलाइट होगी. आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) योगेश बड़वे ने बताया कि भारत के किसी भी आयुर्वेदिक अस्पताल में यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रदर्शन होगा. इसके अलावा संगोष्ठी में जनरल सर्जरी, लैप्रोस्कोपिक, वैस्कुलर, ब्रेस्ट, यूरो और एनो-रेक्टल सर्जरी के लाइव सर्जिकल डिमॉन्स्ट्रेशन भी किए जाएंगे.
आधुनिक साइंस और प्राचीन आयुर्वेद का ‘सुपर-संगम’
‘सौश्रुतम्-2026’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्राचीन आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस का एक अद्भुत संगम होने वाला है. वैज्ञानिक सत्रों में आचार्य सुश्रुत के शल्य सिद्धांत, व्रण प्रबंधन (Wound Management), अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्सा पर विस्तृत चर्चा होगी.
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी.के. प्रजापति ने कहा, “यह संगोष्ठी आयुर्वेदिक और आधुनिक शल्य चिकित्सा के बीच सहयोग को मजबूत करेगी और दुनिया को भारत की शल्य परंपरा की ताकत दिखाएगी.”
दुनियाभर के दिग्गज डॉक्टरों का लगेगा जमावड़ा
इस महा-आयोजन का गवाह बनने के लिए सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि थाईलैंड, इज़राइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और ग्रीस के प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और शल्य विशेषज्ञ दिल्ली पहुंच रहे हैं. भारत के AIIMS, SGPGI लखनऊ और सर गंगा राम अस्पताल के आधुनिक शल्य चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस मंच से अपने विचार साझा करेंगे.
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15 जुलाई के उद्घाटन समारोह में आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरणजीत सिंह संधू और आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा की मौजूदगी इस कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा देगी. भारत का आयुर्वेद अब वैश्विक पटल पर एक नई और हाई-टेक छलांग लगाने को पूरी तरह तैयार है.
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