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क्या सच में वायु प्रदूषण के कारण हो सकता है Brain Tumor? नई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाले खुलासा

Air Pollution Brain Tumor: एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जो लोग लंबी अवधि तक वायु प्रदूषण के संपर्क में ज्यादा रहते हैं, उन्हें ब्रेन ट्यूमर का खतरा ज्यादा है. ट्रैफिक, फैक्ट्रियां आदि की जहरीली गैसें हवा में घुलती है जिससे सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

क्या सच में वायु प्रदूषण के कारण हो सकता है Brain Tumor? नई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाले खुलासा- भारत एक्सप्रेस

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Air Pollution Brain Tumor: हमारे आसपास हर जगह हवा में जहर घुल रहा है. हम इन्हीं आबो हवा में सांस लेने के लिए मजबूर हैं. हम सब जानते हैं कि वायु प्रदूषण के कारण कई तरह की खतरनाक बीमारियां होती हैं लेकिन एक नए अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण न केवल दिल और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि यह ब्रेन में एक सामान्य ट्यूमर, मेनिंजियोमा के खतरे को भी बढ़ा सकता है.

क्या है मेनिंजियोमा ब्रेन ट्यूमर?

मेनिंजियोमा नामक ट्यूमर, जो आमतौर पर कैंसररहित (नॉन-कैंसरस) होता है, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाली पतली परत (मेनिन्जेस) में बनता है. यह ट्यूमर ज्यादातर हानिरहित होता है, लेकिन कभी-कभी इसके कारण सिरदर्द, दौरे पड़ते हैं या ये अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की वजह बन सकते हैं. यह धीरे-धीरे बढ़ता है और कई सालों तक लोगों को पता नहीं चलता लेकिन यह दिमाग में बढ़ते जाता है.

स्टडी में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

न्यूरोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रदूषण और मेनिन्जियोमा के बीच एक संभावित संबंध हो सकता है, हालांकि यह साबित नहीं हुआ कि प्रदूषण ही इसका कारण है. अध्ययन में ट्रैफिक से जुड़े प्रदूषकों जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और अल्ट्राफाइन कणों (बारीक कण) का विश्लेषण किया गया, जो शहरी क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का इन प्रदूषकों के संपर्क में ज्यादा समय बीता, उनमें मेनिन्जियोमा का खतरा अधिक था.

40 लाख लोगों पर किया गया रिसर्च

एक शोधकर्ता ने बताया, “अल्ट्राफाइन कण इतने छोटे होते हैं कि वे रक्त-मस्तिष्क अवरोध को पार कर सकते हैं और मस्तिष्क के ऊतकों को प्रभावित कर सकते हैं.”यह अध्ययन डेनमार्क में करीब 40 लाख वयस्कों पर किया गया, जिनकी औसत आयु 35 वर्ष थी और जिन्हें 21 साल तक ट्रैक किया गया. इस दौरान 16,596 लोगों में मस्तिष्क या सेंट्रल नर्वस सिस्टम का ट्यूमर पाया गया, जिनमें से 4,645 को मेनिन्जियोमा था. शोध में ट्रैफिक से होने वाले अल्ट्राफाइन कणों और मेनिन्जियोमा के बीच संभावित संबंध सामने आया. हालांकि, ग्लियोमा जैसे गंभीर मस्तिष्क ट्यूमर और प्रदूषकों के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं मिला.

एक्सपर्ट ने दी राय

“अध्ययन बताता है कि ट्रैफिक और अन्य सोर्स से लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से मेनिन्जियोमा का खतरा बढ़ सकता है. यह प्रदूषण के मस्तिष्क पर प्रभाव को दर्शाता है, न कि केवल दिल और फेफड़ों पर.”उन्होंने आगे बताया कि यदि स्वच्छ हवा से ब्रेन ट्यूमर का जोखिम कम हो सकता है, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इस निष्कर्ष की पुष्टि के लिए और अध्ययन की जरूरत है.

-भारत एक्सप्रेस 



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