Analog Paneer
Analog Paneer: देश के कई राज्यों में अब एनालॉग पनीर को लेकर सख्ती बढ़ती जा रही है. छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात के बाद मध्य प्रदेश ने भी इसे बैन करने की तैयारी शुरू कर दी है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य में एनालॉग पनीर पर रोक लगाई जाएगी और इसके बजाय प्राकृतिक तरीके से दूध का उत्पादन बढ़ाकर असली पनीर तैयार करने पर जोर दिया जाएगा.
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि पनीर भारतीय खाने का बेहद आम हिस्सा है. सब्जी से लेकर टिक्का, रोल, बिरयानी और कई तरह के स्नैक्स तक में इसका इस्तेमाल होता है. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर एनालॉग पनीर क्या है और सरकारें इसके खिलाफ कार्रवाई क्यों कर रही हैं?
आखिर एनालॉग पनीर होता क्या है? (What is Analog Paneer)
नाम भले ही थोड़ा तकनीकी लगे, लेकिन इसे आसान भाषा में समझें तो एनालॉग पनीर ऐसा उत्पाद है, जो देखने और इस्तेमाल करने में असली पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह दूध से तैयार नहीं किया जाता.
असली पनीर बनाने के लिए दूध को फाड़कर उससे ठोस हिस्सा अलग किया जाता है. वहीं एनालॉग पनीर में दूध की जगह या दूध के साथ दूसरे फैट, स्टार्च और कई खाद्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें पाम ऑयल या दूसरे वनस्पति फैट का इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि इसे तैयार करने की लागत पारंपरिक पनीर की तुलना में कम पड़ सकती है. कुछ उत्पादों में केसिन यानी दूध से मिलने वाला प्रोटीन भी इस्तेमाल किया जाता है, ताकि पनीर जैसी मजबूती और बनावट मिल सके.
इसके अलावा टैपिओका, मक्का या आलू से बने स्टार्च का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. इमल्सीफायर और स्टेबलाइजर जैसी चीजें तेल, पानी और दूसरे घटकों को एक साथ रखने में मदद करती हैं. नमक, फ्लेवर और रंग का इस्तेमाल स्वाद और रूप को बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है. यानी कुल मिलाकर ऐसा उत्पाद तैयार किया जाता है जो दिखने और खाने में पनीर जैसा महसूस हो, लेकिन उसकी संरचना पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग हो सकती है.
क्या एनालॉग पनीर बेचना हमेशा गैर-कानूनी है?
यहां एक जरूरी बात समझना बेहद जरूरी है. एनालॉग पनीर शब्द अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कोई उत्पाद जहरीला या खतरनाक है. असली सवाल यह है कि उसमें कौन-कौन से पदार्थ इस्तेमाल किए गए हैं, वह खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है या नहीं और उसे ग्राहक के सामने किस नाम से पेश किया जा रहा है.
अगर किसी उत्पाद को नियमों के मुताबिक तैयार किया गया है और उसकी सही लेबलिंग की गई है, तो उपभोक्ता को पता होना चाहिए कि वह असली डेयरी पनीर नहीं, बल्कि एनालॉग या नॉन-डेयरी उत्पाद खरीद रहा है. दिक्कत तब पैदा होती है जब ऐसे उत्पाद को असली पनीर बताकर ग्राहक को बेचा या खिलाया जाता है. ऐसी स्थिति में उपभोक्ता के साथ धोखा हो सकता है और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
ये भी पढ़ें: Proteinmaxxing Trend: हेल्दी स्नैकिंग के साथ बढ़ा प्रोटीन का क्रेज, जानें क्यों बदल रही है लोगों की डाइट
असली पनीर और एनालॉग पनीर में कैसे करें पहचान? (Dairy paneer vs analog paneer)
सिर्फ देखकर दोनों में फर्क करना हमेशा आसान नहीं होता. फिर भी कुछ सामान्य संकेत मदद कर सकते हैं. असली पनीर में आमतौर पर हल्की दूधिया खुशबू होती है. इसकी बनावट मुलायम होने के साथ थोड़ी दानेदार भी महसूस हो सकती है. स्वाद में हल्की मिठास और मलाईपन होता है.
मध्य प्रदेश में प्रस्तावित प्रतिबंध के बाद एनालॉग पनीर को लेकर देश में बहस और तेज होगी है. फिलहाल इतना साफ है कि सरकारों का फोकस सिर्फ सस्ता विकल्प रोकने पर नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर है कि ग्राहक को जो चीज पनीर के नाम पर दी जा रही है, उसके बारे में उसे सही और साफ जानकारी मिले.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


