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रक्तदान से नहीं होती कमजोरी! जानिए कौन कर सकता है ब्लड डोनेट और क्या हैं जरूरी नियम

Blood donation awareness: स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रक्तदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करते हुए इसे पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया बताया है. यदि अधिक से अधिक लोग नियमित रूप से रक्तदान करें तो देश में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है.

Blood donation awareness

Blood donation awareness

Blood donation awareness: रक्तदान को ‘महादान’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान कई गंभीर मरीजों के जीवन की रक्षा कर सकता है. इसके बावजूद समाज में आज भी बड़ी संख्या में लोग गलत धारणाओं और डर के कारण रक्तदान करने से बचते हैं. इसका उद्देश्य लोगों को रक्तदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना है.

शरीर कमजोर होने की धारणा पूरी तरह गलत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रक्तदान को लेकर सबसे बड़ी भ्रांति यह है कि इससे शरीर कमजोर हो जाता है या लंबे समय तक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. डॉक्टरों के अनुसार, यह धारणा पूरी तरह निराधार है. एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और शरीर कुछ ही समय में रक्त की कमी की भरपाई कर लेता है. नियमित रक्तदान से स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता.

स्वास्थ्य जांच के बाद ही किया जाता है रक्तदान

विशेषज्ञ बताते हैं कि रक्तदान से पहले प्रत्येक डोनर की स्वास्थ्य जांच की जाती है. इसमें हीमोग्लोबिन, रक्तचाप और सामान्य स्वास्थ्य की स्थिति का परीक्षण शामिल होता है. केवल वही व्यक्ति रक्तदान कर सकता है जो पूरी तरह स्वस्थ हो. 18 से 65 वर्ष की आयु के लोग रक्तदान के लिए पात्र माने जाते हैं, बशर्ते उनका हीमोग्लोबिन स्तर कम से कम 12.5 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो.

नियमित रक्तदान से दूर हो सकती है रक्त की कमी

यदि अधिक से अधिक लोग नियमित रूप से रक्तदान करें तो देश में रक्त की कमी की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है. एक यूनिट रक्त दुर्घटना, बड़ी सर्जरी, प्रसव और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में कई मरीजों के उपचार में जीवनरक्षक साबित होता है.

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जागरूकता अभियान से बढ़ रही भागीदारी

डॉक्टरों के अनुसार पुरुष हर तीन महीने में और महिलाएं हर चार महीने में सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकती हैं. पूरी प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है और इससे शरीर में नई रक्त कोशिकाओं के निर्माण को भी बढ़ावा मिलता है. रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, शैक्षणिक संस्थान और सामाजिक संगठन लगातार शिविरों एवं जनजागरूकता अभियानों का आयोजन कर रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग वैज्ञानिक तथ्यों को समझें और भ्रांतियों से बाहर निकलें, तो देश में सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है.

भारत एक्सप्रेस



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