Father’s Day 2025: हर साल जून के तीसरे रविवार को दुनियाभर में फादर्स डे मनाया जाता है, दरअसल यह दिन उन लोगों के लिए समर्पित होता है जो हर परिस्थिति में हमारे साथ मजबूती से खड़े रहते हैं. जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘पिता’ की.
साल 2025 में फादर्स डे 15 जून को मनाया जाएगा, जो सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक फीलिंग है- उन अनकहे एहसासों की, जो एक पिता अपने बच्चों के लिए हर रोज जीता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिन की शुरुआत एक बेटी (Father’s Day 2025 History) ने अपने पिता के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना से की थी?
कैसे हुई फादर्स डे की शुरुआत?
फादर्स डे की शुरुआत अमेरिका में 20वीं सदी की शुरुआत में हुई थी. हालांकि, 1908 में वेस्ट वर्जीनिया में एक चर्च ने खदान हादसे में मारे गए पिताओं की याद में एक स्मृति सभा आयोजित की थी, लेकिन वह आयोजन सालाना छुट्टी के रूप में नहीं था.
फादर्स डे को एक पर्व के रूप में स्थापित करने का श्रेय सोनोरा स्मार्ट डॉड को जाता है, जो वॉशिंगटन राज्य के स्पोकेन शहर की रहने वाली थीं. 1909 में जब उन्होंने मदर्स डे का एक प्रवचन सुना, तो उनके मन में सवाल उठा कि माताओं की तरह पिताओं के लिए भी कोई दिन क्यों नहीं होता?
उनके प्रेरणा स्रोत उनके पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट थे, जो एक सिविल वॉर (गृहयुद्ध) के पूर्व सैनिक थे. पत्नी की मृत्यु के बाद उन्होंने अपने छह बच्चों की अकेले परवरिश की. यही प्रेरणा सोनोरा को इस खास दिन की शुरुआत करने की ओर ले गई.
कौन थीं सोनोरा स्मार्ट डॉड?
1882 में अर्कांसस में जन्मी सोनोरा बचपन में ही अपने परिवार के साथ स्पोकेन, वॉशिंगटन आ गई थीं. जब वह केवल 16 साल की थीं, तब उनकी मां का निधन हो गया. इसके बाद उनके पिता ने उन्हें और उनके भाई-बहनों को अकेले ही पाला.
सोनोरा ने 1899 में जॉन ब्रूस डॉड से विवाह किया और 1909 में उनके एक बेटे का जन्म हुआ. लेकिन सोनोरा सिर्फ एक मां या बेटी ही नहीं थीं, वह एक कवयित्री, कलाकार और समाजसेवी भी थीं. उन्हें लगता था कि पिता भी उतने ही सम्मान के हकदार हैं जितनी मांएं. यही सोच उन्हें फादर्स डे की नींव रखने की ओर ले गई.
जून 1910 में हुआ मनाया गया था पहला फादर्स डे
सोनोरा ने पहले अपने पिता के जन्मदिन यानी 5 जून को फादर्स डे के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन चर्च को तैयारी के लिए समय चाहिए था, इसलिए यह आयोजन 19 जून 1910 को किया गया.
यह पहला आयोजन स्पोकेन YMCA में हुआ, जहां पिताओं को समर्पित विशेष प्रवचन दिए गए. लोगों ने चर्च जाकर अपने पिताओं के प्रति आभार प्रकट किया. उस समय गुलाब के फूल को इस दिन का प्रतीक माना गया—लाल गुलाब जीवित पिता के लिए और सफेद गुलाब दिवंगत पिताओं की स्मृति में पहना जाता था.
कैसे बनी यह राष्ट्रीय अवकाश?
शुरुआत में यह दिन लोगों को उतना आकर्षित नहीं कर पाया. कई लोगों ने इसे व्यापारिक चाल बताया, जिसमें दुकानदारों को मुनाफा कमाने का मौका दिखा. इससे निराश होकर सोनोरा ने कुछ समय के लिए अपने अभियान को विराम दे दिया.
लेकिन 1930 के दशक में उन्होंने फिर से इसे आगे बढ़ाया. इस बार उन्हें कपड़ा और तंबाकू उद्योग जैसी व्यापारिक संस्थाओं का समर्थन मिला. धीरे-धीरे यह दिन लोकप्रिय होता गया और 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इसे आधिकारिक रूप से जून के तीसरे रविवार को “फादर्स डे” घोषित किया.
आज भी क्यों खास है फादर्स डे?
समय भले ही बदल गया हो, लेकिन फादर्स डे आज भी उतना ही खास है. यह दिन सिर्फ उपहार देने का नहीं बल्कि पिता या अभिभावक की भूमिका को सम्मान देने का है—चाहे वह जैविक हों, दत्तक हों या फिर जीवन में किसी भी रूप में पिता जैसे रहे हों.
सोनोरा स्मार्ट डॉड की सोच ने एक परंपरा की शुरुआत की जो आज भी दुनिया के कोने-कोने में जीवित है. हर साल जब हम फादर्स डे मनाते हैं, तो हम उस बेटी को भी याद करते हैं, जिसने अपने पिता के प्रति प्रेम को दुनिया भर के पिता सम्मानित करने की मिसाल बना दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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