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हड्डियों को लोहे जैसा मजबूत बना देगा सिर्फ एक चम्मच तिल, आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ने माना इसका लोहा

Sesame Seeds Bone Health: तिल चाहे काले हों या सफेद, दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में तिल को बल्य यानी ताकत बढ़ाने वाला और स्निग्ध यानी शरीर को पोषण देने वाला कहा गया है. आयुर्वेद में तिल को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है.

Sesame seeds bone health

इस डिजिटल युग में हमारे खानपान से लेकर शारीरिक गतिविधियों तक में काफी कमी आ गई है. जिसका सबसे ज्यादा असर हमारी हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ता है. थोड़ी सी वॉक में थकान हो जाती है. अगर तेज चल दें तो पैर की नसें खींच जाती हैं. अगर कुछ देर बैठ जाएं तो जोड़ों में दर्द, पीठ में खिंचाव और शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे यह समस्या और ज्यादा होने लगती है. आयुर्वेद इसे जहां वात दोष मानता है. तो वहीं विज्ञान इसे शरीर में पोषक तत्वों की कमी का नतीजा मानता है. ऐसे में तिल एक प्राकृतिक उपाय बनकर उभरता है.

तिल चाहे काले हों या सफेद, दोनों ही सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. आयुर्वेद में तिल को बल्य यानी ताकत बढ़ाने वाला और स्निग्ध यानी शरीर को पोषण देने वाला कहा गया है. विज्ञान के अनुसार, तिल कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे जरूरी मिनरल्स से भरपूर होते हैं. तीनों तत्व मिलकर हड्डियों की नींव को मजबूत करते हैं और मांसपेशियों को सहारा देते हैं.

कैल्शियम है रामबाण

सिर्फ कैल्शियम ही हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए काफी नहीं होता. मैग्नीशियम कैल्शियम को सही जगह पहुंचाने में मदद करता है और फॉस्फोरस हड्डियों की बनावट को संतुलित रखता है. तिल में ये तीनों तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं, इसलिए इनका असर धीरे-धीरे लेकिन लंबे समय तक रहता है. यही वजह है कि आयुर्वेद में तिल को रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है.

तिल से मिलेगा कमजोर हड्डियों को आराम

बढ़ती उम्र में हड्डियों का कमजोर होना एक आम समस्या है, खासकर महिलाओं में. विज्ञान इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहता है. आयुर्वेद मानता है कि अगर सही समय पर शरीर को पोषण मिल जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है. रोजाना थोड़ा सा तिल खाने से हड्डियों को अंदर से मजबूती मिलती है और उनके टूटने का खतरा कम होता है.

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जोड़ों के दर्द में है मददगार

तिल सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, जोड़ों के दर्द में भी मददगार साबित होता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर की सूजन को कम करने में सहायक होते हैं. जिन लोगों को घुटनों में दर्द, गर्दन की जकड़न या गठिया जैसी समस्या रहती है, उनके लिए तिल एक सरल घरेलू उपाय की तरह काम करता है. सर्दियों में इसका असर और भी बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से गर्माहट भी देता है.

आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों ही मानते हैं कि तिल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. रोजाना एक से दो चम्मच तिल काफी होते हैं. इसे खाने के कई आसान तरीके हैं. तिल को हल्का सा भूनकर खाया जा सकता है, सब्जी या सलाद में मिलाया जा सकता है, या फिर गुड़ के साथ लड्डू बनाकर भी खाया जाता है. पारंपरिक तिल-गुड़ के लड्डू सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं होते, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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