कलंदर संगमरमर के मकानों में नहीं मिलता
मैं असली घी हूं बनियों की दुकानों में नहीं मिलता
मरहूम शायर मुनव्वर राणा खुद को डालडा भी बोल सकते थे पर उन्होंने ने भी घी को ही तव्ज्जो दिया. इससे पता चलता है कि खाने-पीने के बाज़ार में घी की ही धाक है.
ऐसे समय में जब लोग मैं असली घी और नकली घी में फर्क नहीं कर पाते और महंगी घी को ही असली घी मान कर इस्तेमाल कर रहे हैं. अब बाज़ार में एक और घी आ गया है, जिसे A2 घी कहते हैं. इससे पहले की आप कन्फ्यूजन में माथा पकड़ें, हम आपको A2 घी के बारे में एक-एक कर सब कुछ बता रहे हैं.
क्लीन न्यूट्रिशन, हेल्दी और नैचुरल फुड का ध्यान रखने वालों के बीच A2 घी चर्चाओं के केंद्र में रहता है. भारतीय किचन और आयुर्वेदिक ग्रंथों में तरल सोना (Liquid Gold) कहे जाने वाले A2 घी को अब मॉर्डन सुपरफूड कहा जा रहा है. इसके पीछे कारण भी है.
A2 घी (A2 Ghee) को मार्केट बूस्ट सिर्फ प्रचार से नहीं, बल्कि इसके पीछे पोषण विज्ञान और इसको बनाने के लिए अपनाई जाने वाली पारंपरिक तरीके भी मुख्य कारण हैं.
इसकी प्रशंसा सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के हेल्थ सेक्टर में भी तेज़ी से हो रही है. आइए इसे समझते हैं.
A2 घी क्या है और यह आम घी से कैसे अलग है?
A2 घी और आम घी के बीच मुख्य अंतर इसे बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले दूध में है. A2 घी गिर, साहीवाल और राठी जैसी देसी भारतीय गायों के दूध से बनता है, जिनके दूध में केवल A2 बीटा-कैसिइन प्रोटीन होता है.
वहीं भारत और विदेशों के बाज़ारों में मिलने वाला अधिकतर दूध और घी जर्सी या होल्स्टीन जैसी हाइब्रिड या पश्चिमी नस्लों की गायों से मिलते है, जिनमें A1 बीटा-केसीन होता है. इस प्रोटीन को कुछ रिसर्चर्स ने सूजन और ऑटोइम्यून डिजीज का कारण मानते हैं.
कुछ स्टडिज़ ने A1 बीटा-केसीन को टाइप 1 मधुमेह, कोरोनरी हार्ट डिजीज, आर्टेरियोस्क्लेरोसिस, ऑटिज्म और सिज़ोफ्रेनिया और अचानक शिशु मृत्यु सिंड्रोम का कारण बताया है.

बिलोना विधि: पारंपरिक तरीका क्यों मायने रखती है?
घी बनाने या निकालने के लिए तरीका बहुत मायने रखता है. A2 घी निकालने के लिए बिलोना विधि (Belona Method) अपनाई जाती है. इसे 5,000 साल पुरानी विधि माना जाता है.
बिलोना विधि के चार स्टेज :-
-A2 गाय का दूध उबालना
-इसे ठंडा करके इसमें दही डालकर रात भर खमीर उठने दें
-मक्खन को अलग करने के लिए लकड़ी की मथनी (बिलोना) का उपयोग करके जमे हुए दही को हाथ से मथना
-घी निकालने के लिए मक्खन को धीमी आंच पर पकाना

विटामिनों से भरपूर है A2 घी
हर स्टेज में महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को संरक्षित किया जाता है. साथ ही पाचन क्षमता को बढ़ाया जाता है. इसके बाद अखरोट जैसी खूशबू वाले सुनहरे रंग का दानेदार घी तैयार हो जाता है. यही सारी विशेषताएं इसे शुद्ध A2 घी बनाती है.
बिलोना विधि से तैयार A2 घी विटामिन A,D,E और विटामिन K2 भरपूर मात्रा में होते हैं. इसके अलावा ओमेगा-3 और ओमेगा-9 फैटी एसिड भी मिलते हैं, जो दिल और दिमाग को फंक्शन को बेहतर बनाता है.
इसके अलावा यह आसानी से पच जाता है और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण बच्चों, गर्भवती महिलाओं, एथलीटों और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है.
वहीं कई लोग जो दूध या पनीर बर्दाश्त नहीं कर सकते, वे अक्सर A2 घी को बिना किसी शिकायत के सेवन कर पातें हैं. इसके अलावा A2 घी इम्मयुन, स्किन नरिशमेंट, बालों का झड़ना और कोलेस्ट्रॉल में भी मदद करता है.

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नकली या घटिया A2 घी को कैसे पहचानें?
लोकप्रियता के कारण बाज़ार में A2 घी (A2 Ghee) के नाम पर कई घटिया और नकली प्रोडक्ट भी बाज़ार में आ गए हैं. इन्हें पहचानने के लिए इन चीजों का ध्यान रखें.
गाय की नस्ल: सुनिश्चित करें कि यह गिर जैसी भारतीय देसी नस्लों से ली गई हो, हाइब्रिड से नहीं
विधि: घी निकालने के लिए बिलोना विधि का इस्तेमाल किया गया है
दानेदार टेक्सचर: असली A2 घी दानेदार रूप में जम जाता है
गंध और स्वाद: अच्छे A2 घी में अखरोट जैसी सुगंध और गहरा स्वाद होता है, न कि फीका या जला हुआ.
A2 घी बेहतरीन है, लेकिन बैलेंस बनाना भी ज़रूरी है. आप सभी चीजों के लिए इसका इस्तेमाल करने की बजाय तेज आंच पर पकने वाले खाने के लिए A2 घी का इस्तेमाल कर सकते हैं.
ध्यान रखें ऊपर लिखी गई बातें महज़ ओपिनियन है, आप कुछ भी अपनाने या छोड़ने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें.
-भारत एक्सप्रेस
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