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गुंजन फाउंडेशन के ‘दस्तक-ए-दिल’ ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध, संगीत मंडली कबीर कैफे ने बांधा सुरों का समां

Gunjan Foundation Programe: गुंजन फाउंडेशन ने दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में “दस्तक-ए-दिल” कार्यक्रम का आयोजन किया. भारत एक्सप्रेस ने मीडिया पार्टनर के रूप में कार्यक्रम का कवरेज किया.

Gunjan Foundation program

कोमल शर्मा, नई दिल्ली.


शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में काम कर रही प्रतिष्ठित संस्था गुंजन फाउंडेशन ने दिल्ली के मंडी हाउस स्थित कमानी ऑडिटोरियम में एक यादगार सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया. इस खास अवसर पर मंच पर प्रस्तुत हुई संगीत मंडली कबीर कैफ़े ने अपनी सुरीली धुनों और कबीर के दोहों को आधुनिक संगीत से जोड़कर ऐसा समां बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए. कार्यक्रम की थीम “दस्तक-ए-दिल” थी, जिसने दर्शकों के दिलों पर सचमुच दस्तक दी.

कबीर कैफ़े के कलाकारों ने “मन लागो मेरो यार फकीरी में”, “मोक्को कहां ढूंढे रे बंदे” और अन्य लोकप्रिय रचनाओं को गाकर आध्यात्मिकता और आधुनिक संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया. तालियों की गूंज और दर्शकों का उत्साह उनकी प्रस्तुति की सफलता का प्रमाण था.

संस्कृति-परंपरा को जोड़ना उद्देश्य: सुषमा सिंघवी

इस अवसर पर गुंजन फाउंडेशन की संस्थापक सुषमा सिंघवी ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल शिक्षा और समाज सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कृति और परंपरा को भी आगे बढ़ाना है. उन्होंने बताया कि “दस्तक-ए-दिल” जैसे आयोजन समाज को जोड़ने, सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने और युवाओं को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए बेहद जरूरी हैं. कार्यक्रम में समाजसेवी, शिक्षा जगत से जुड़े लोग और मीडिया प्रतिनिधि बड़ी संख्या में मौजूद रहे. दर्शकों ने ना केवल संगीत का आनंद लिया, बल्कि संस्था की पहल की सराहना भी की.

भारत एक्सप्रेस की साझेदारी ने बढ़ाई जागरूकता

गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में भारत एक्सप्रेस ने मीडिया पार्टनर की भूमिका निभाई. भारत एक्सप्रेस ने इस कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर कवरेज देते हुए समाज में जागरूकता और सांस्कृतिक चेतना फैलाने में अहम योगदान दिया. कार्यक्रम में आए मेहमानों ने कहा कि कबीर कैफ़े का प्रदर्शन सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं था, बल्कि जीवन मूल्यों और आध्यात्मिक संदेशों को जीवंत करने वाला अनुभव था. इस तरह के आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. गुंजन फाउंडेशन की यह पहल दर्शाती है कि शिक्षा और समाजसेवा के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को संजोना और आगे बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है.

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