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Navratri 2025 Rangoli Design: इस नवरात्रि घर पर बनाए ये लेटेस्ट और सिंपल रंगोली डिजाइन, माता रानी के स्वागत में लगाएं चार चांद

इस साल नवरात्रि का पर्व 22 सितंबर से शुरू होने वाला है. इस शुभ अवसर पर भक्तों में उत्साह का माहौल होता है. कई लोग माता के स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ों की थाप लगाते हैं, जबकि कुछ इसे थोड़ा अलग अंदाज में मनाना पसंद करते हैं.

Navratri 2025 Rangoli Design
  • नमिता वर्मा

Navratri 2025 : इस साल नवरात्रि (Navratri 2025) का पर्व 22 सितंबर से शुरू होने वाला है. कई लोग माता के स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ों की थाप लगाते हैं, जबकि कुछ इसे थोड़ा अलग अंदाज में मनाना पसंद करते हैं. अगर आप भी नवरात्रि में कुछ नया और खास करना चाहते हैं, तो आइए देखें कैसे आप अपने घर को रंगोली से सजाकर माता रानी का स्वागत कर सकते हैं और त्योहार की खुशी बढ़ा सकते हैं.

चरण रंगोली - यह एक भारतीय पारंपरिक लोक कला है जिसमें धन की देवी माँ लक्ष्मी के चरणों या पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जिसे घर के प्रवेश द्वार पर बनाया जाता है और अगर आप चाहें, तो अपने घर की चौखट पर लक्ष्मी माता के चरण-चिन्हों की रंगोली बना सकते हैं. यह सौभाग्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए बेहतरीन है.

अंबाबाई रंगोली - आप चाहें, माता लक्ष्मी या देवी अंबा की प्रतिमा के डिज़ाइन से रंगोली बना सकते है. इसे घर की चौखट पर सजाकर माता का स्वागत किया जाता है. यह रंगोली काफी आकर्षक लगती है. अंबाबाई रंगोली कोई अलग से खास रंगोली नहीं है, बल्कि यह रंगोली कला का ही एक रूप है.

दुर्गा मां रंगोली - माता दुर्गा के चित्र या प्रतीकों के साथ बनाई जाती है. नवरात्रि और दुर्गा पूजा के लिए खास, रंग-बिरंगी और आकर्षक. अगर आप चाहें तो दुर्गा मां के चित्र की रंगोली बना सकते हैं. यह देखने में सुंदर और अलग लगती है. यह एक ऐसी रंगोली है जिसे बनाते समय माँ दुर्गा से संबंधित प्रतीक या डिज़ाइन बनाए जाते हैं, या फिर इसे दुर्गा पूजा जैसे अवसरों पर विशेष रूप से बनाया जाता है.

फूल रंगोली - फूल रंगोली, जिसे दक्षिण भारत में पूकलम भी कहा जाता है, एक कला रूप है जिसमें रंगोली बनाने के लिए चावल के आटे, चूना पत्थर, या अन्य सामग्री के बजाय विभिन्न प्रकार के फूलों, पत्तियों और पंखुड़ियों का उपयोग किया जाता है. यह एक पारंपरिक प्रथा है जिसे शुभ अवसरों, खासकर ओणम जैसे हिंदू त्योहारों के दौरान, घर के फर्श को सजाने और देवी लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए बनाया जाता है.

फ्लोरल और दीपक रंगोली - फ्लोरल में फूलों का इस्तेमाल करके बनाई जाती है, जबकि दीपक रंगोली में डिजाइन के केंद्र या उसके आसपास दीपक रखे जाते हैं. ये दोनों रंगोली के ही प्रकार हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप की पारंपरिक सजावटी लोक कला का हिस्सा हैं और इन्हें खुशी, उत्सव और स्वागत के प्रतीक के रूप में बनाया जाता है अगर आप चाहें तो फ्लोरल डिजाइन अपना सकते हैं साथ ही इसमें दीपक को भी रंगोली के साथ सजाया जा सकता है, जिससे यह और भी आकर्षक लगेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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