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रामायण का खुलासा जाने दारा सिंह को हनुमान बनाने में क्यों लगते थे 4 घंटे, क्या था मेकअप का राज?

टीवी शो से लेकर कई फिल्मों तक में हमने कई स्टार्स को हनुमान जी का किरदार निभाते हुए देखा है, लेकिन सबसे पहले जिनका नाम और चेहरा दिमाग में आता है, वो दारा सिंह ही रहे हैं.

dara singh as hanuman
Vijay Ram Edited by Vijay Ram
  • नमिता वर्मा

Dara Singh Birth Anniversary: टीवी शो से लेकर कई फिल्मों तक में हमने कई स्टार्स को हनुमान जी का किरदार निभाते हुए देखा है, लेकिन सबसे पहले जिनका नाम और चेहरा दिमाग में आता है, वो दारा सिंह (Dara Singh) ही रहे हैं. उन्होंने रामानंद सागर की रामायण (1987-88) में हनुमान का किरदार निभाया था और उनका अभिनय ऐसा रहा कि लाखों लोग उनके दीवाने हो गए.

हनुमान जी का रूप देने के लिए खास मेकअप और प्रोस्थेटिक मास्क का इस्तेमाल होता था. दारा सिंह के चेहरे पर लेटेक्स और फाइबर से बना मास्क लगाया जाता था, जिसे गोंद से चिपकाया जाता था. माथे पर तिलक, बड़ी आंखें, होंठों के किनारों पर डिज़ाइन, कान और मुकुट अलग से लगाए जाते थे. साथ ही लंबी पूंछ, गदा और केसरिया/सिंदूरी वस्त्र पहनाकर पारंपरिक स्वरूप तैयार किया जाता था.

रामानंद सागर की रामायण (1987) के समय आधुनिक VFX या डिजिटल तकनीक उपलब्ध नहीं थी, इसलिए हनुमान जी का रूप पारंपरिक मेकअप और रबर/लेटेक्स से बने प्रोस्थेटिक पीस से तैयार किया जाता था. यह पूरा मास्क नहीं होता था, बल्कि नाक, गाल, होंठ और जबड़े जैसे हिस्सों पर अलग-अलग पीस लगाए जाते थे. इन्हें हल्के लेटेक्स/फोम रबर से बनाया जाता था ताकि चेहरा भारी न लगे और हाव-भाव साफ दिखें. कान और माथे का तिलक वाला भाग भी अलग से जोड़ा जाता था.अंत में नारंगी या सिंदूरी रंग का मेकअप और हल्का हेयर-स्प्रे करके चेहरा हनुमान जी जैसा दिखाया जाता था.

दारा सिंह, जिनका असली नाम दीदार सिंह रंधावा था, पंजाब के अमृतसर में जन्मे थे. वे न सिर्फ मशहूर अभिनेता थे बल्कि एक बेहतरीन रेसलर भी रहे। उनकी लंबी-चौड़ी कद-काठी, मजबूत शरीर, आकर्षक चेहरा और दमदार आवाज उन्हें अलग पहचान देते थे. रामायण में हनुमान का किरदार निभाने को लेकर एक चुनौती उनकी पंजाबी लहजा था, क्योंकि धारावाहिक के सभी संवाद शुद्ध हिंदी में थे.इसके बावजूद, दारा सिंह ने अपने अभिनय से सबका दिल जीत लिया और इस किरदार को अमर बना दिया.
हनुमान जी का किरदार निभाते समय दारा सिंह को रोज़ भारी मेकअप और खास मुखौटा पहनना पड़ता था, जिसे लगाने में 2–3 घंटे और हटाने में भी समय लगता था। शूटिंग के बाद यह मेकअप हटाना जरूरी था, वरना त्वचा को नुकसान हो सकता था. मास्क इस तरह बनाया गया था कि वे बोल और खा सकें, लेकिन गोंद और मेकअप की वजह से उन्हें सिर्फ हल्का या तरल भोजन लेना पड़ता था. मेकअप आर्टिस्ट हमेशा पास रहते ताकि कोई खराबी तुरंत ठीक की जा सके. अनुशासन, संयम और उनके मजबूत शरीर ने इस किरदार को दिव्यता दी, जिसे आज भी सबसे श्रेष्ठ माना जाता है.
रामानंद सागर की रामायण छोटे पर्दे पर राम-सीता के जीवन पर आधारित पहली बड़ी प्रस्तुति थी, और इसमें दारा सिंह ने अपने तेजस्वी चेहरे, वीरता भरी नजरों और मांसल काया से हनुमान जी को जीवंत कर दिया. विश्वविख्यात पहलवान होने के कारण उनका व्यक्तित्व ही हनुमान का आभास कराता था, जो अभिनय से परे उनकी प्राकृतिक आभा थी. बाद के कलाकारों ने प्रयास किए, लेकिन दारा सिंह जैसी बलिष्ठ देह और दिव्यता कोई दोहरा नहीं पाया.

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