Diwali Tradition: दिवाली जिसे दीपावली भी कहते हैं. भारत का सबसे महत्वपूर्ण और लोकप्रिय त्योहार है. यह कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है. इस दीपावली अगर आप कुछ नया अनुभव करना चाहते हैं तो भारत के उत्तर और दक्षिण दोनों हिस्सों की यात्रा जरुर करें. दिवाली भले ही पूरे देश में रोशनी और खुशियों का पर्व है, लेकिन इसे मनाने की कहानी दोनों हिस्सों में बिल्कुल अलग है.
उत्तर भारत में दिवाली भगवान राम की अयोध्या वापसी का प्रतीक है जबकि दक्षिण भारत में यह भगवान कृष्ण द्वारा राक्षस नरकासुर के वध के उत्सव के रुप में मनाई जाती है. इस साल दिवाली 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी.
उत्तर भारत की दिवाली
भारत के उत्तरी इलाके में दिवाली दीपों की रोशनी और उल्लास से भरी होती है. लोग भगवान राम के स्वागत में दीये जलाते हैं और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करते हैं. धनतेरस से शुरू होने वाले इस पर्व में घरों की सजावट, खरीदारी और रामायण आधारित झांकियां आयोजित की जाती हैं. व्यापारियों के लिए यह दिन नए साल की शुरुआत भी माना जाता है.
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दक्षिण भारत की दिवाली
दक्षिण भारत में दिवाली ‘नरक चतुर्दशी’ के रूप में मनाई जाती है. यह दिन कृष्ण और सत्यभामा द्वारा राक्षस नरकासुर के वध का प्रतीक है. यहां सुबह तेल स्नान, मिठाइयों और नए वस्त्रों की परंपरा इस दिन को खास बनाती है.
तमिलनाडु में यह विजय का पर्व है जबकि कर्नाटक में इसे बाली चतुर्दशी कहा जाता है जो धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है. दिवाली सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि भारत की विविधता और एकता की झलक है. उत्तर की भव्यता और दक्षिण की परंपराओं का संगम इस पर्व को रोशनी का उत्सव बनाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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