Bharat Express DD Free Dish

Aaj Ka Panchang 04 October 2025: सूर्य और चंद्रमा की चाल से बदलेगी कई राशियों की किस्मत, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त और दिशा शूल

आज शनि प्रदोष व्रत भी है और साथ ही पंचक की शुरुआत भी हो रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि मेष से लेकर मीन राशि तक के लिए आज का राशिफल क्या संदेश लेकर आया है.

Aaj Ka Panchang, Panchang, Daily Astrology

Aaj Ka Panchang 04 October 2025: आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है और आज शनिवार का दिन है. यह तिथि शाम 5 बजकर 10 मिनट तक बनी रहेगी. सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा. इसी समय तक धनिष्ठा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जिसके बाद शतभिषा नक्षत्र आरंभ हो जाएगा. आज शनि प्रदोष व्रत भी है और साथ ही पंचक की शुरुआत भी हो रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कैसा रहेगा आज का दिन.

सूर्य और चंद्रमा से जुड़ी बातें

सूर्य जब एक नक्षत्र से दूसरे नक्षत्र में प्रवेश करता है तो उसे सूर्य का गोचर कहा जाता है. इस परिवर्तन से स्वास्थ्य, ऊर्जा और आत्मविश्वास पर असर पड़ता है. इसी तरह चंद्रमा की राशि बदलने से मन, भावनाएं और निर्णय क्षमता प्रभावित होती है.

जिस राशि में सूर्य स्थित होते हैं, वहाँ सूर्यबल मिलता है और जिस राशि में चंद्रमा रहते हैं, वहाँ चंद्रबल प्राप्त होता है. यही कारण है कि सूर्य-चंद्रमा की चाल को पंचांग में विशेष महत्व दिया गया है.

शुभ मुहूर्त

दिन में कुछ समय ऐसे होते हैं जो कार्यों के आरंभ के लिए बहुत ही उत्तम माने जाते हैं. जैसे अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय आता है और इसे अत्यंत मंगलकारी माना जाता है. इसके अलावा विजय मुहूर्त और सर्वार्थ सिद्धि योग भी जीवन के महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए श्रेष्ठ हैं.

ये भी पढ़ें- Aaj Ka Panchang 03 October 2025: आज रखा जाएगा पापांकुशा एकादशी व्रत, पंचांग के अनुसार जानें दिनभर के शुभ-अशुभ योग

अशुभ मुहूर्त

जैसे शुभ समय होते हैं, वैसे ही दिन के कुछ अशुभ समय भी माने गए हैं. राहु काल, यमगण्ड और गुलिक काल ऐसे समय हैं जब बड़े कार्य करने से बचना चाहिए. इन समयों में शुरू किए गए काम अक्सर रुकावटों और कठिनाइयों का सामना करते हैं.

दिशा शूल

हर दिन एक दिशा में यात्रा वर्जित मानी जाती है जिसे दिशा शूल कहा जाता है. यदि उस दिशा में जाना अनिवार्य हो, तो विशेष उपाय करके ही यात्रा करनी चाहिए. उदाहरण के लिए किसी दिन पश्चिम दिशा में शूल हो तो यात्रा से पहले दही या गंगा जल ग्रहण करने की परंपरा है.

सूर्यबल और चंद्रबल

पंचांग में सूर्यबल और चंद्रबल का उल्लेख भी विशेष महत्व रखता है. सूर्यबल से तात्पर्य है कि सूर्य किस राशि को बल दे रहे हैं और उस राशि के जातक किस प्रकार लाभान्वित होंगे.

वहीं चंद्रबल मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और निर्णय क्षमता से जुड़ा होता है. जिस राशि में चंद्रमा स्थित रहते हैं, उस राशि वालों को दिनभर मानसिक सुकून और आत्मबल मिलता है.

Also Follow Bharat Express on X

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read