Aaj Ka Panchang 5 October 2026: आज 5 अक्टूबर 2026, दिन सोमवार को आश्विन कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है. हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष की दृष्टि से आज का दिन पितृ पूजन और देवाधिदेव महादेव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. पितृपक्ष के दौरान आज उन सभी पूर्वजों और दिवंगत परिजनों का विधिवत श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाएगा जिनका देहावसान किसी भी माह की दशमी तिथि को हुआ था.
पूर्णिमांत गणना के अनुसार आश्विन और अमांत गणना के अनुसार भाद्रपद मास चल रहा है, लेकिन दोनों ही पद्धतियों में कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि समान रूप से प्रभावी रहेगी. नई दिल्ली की पंचांगीय गणना के आधार पर दशमी तिथि आज पूरे दिन और रात को पार करते हुए 6 अक्टूबर की सुबह तड़के 02 बजकर 08 मिनट (कुछ गणनाओं में 02:09 बजे) तक बनी रहेगी.
आज का संपूर्ण पंचांग (Aaj Ka Panchang Monday)
आज सोमवार का दिन होने से भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक का भी विशेष फल प्राप्त होगा. सुबह 9 बजकर 51 मिनट तक मंगलकारी शिव योग रहेगा. नक्षत्रों के अधिपति पुष्य नक्षत्र का संयोग रात 11 बजकर 10 मिनट तक बना रहेगा और चंद्रमा पूरे अहोरात्र अपनी स्वराशि कर्क में संचरण करेंगे. हालांकि, पंचांग में कई ऐसे मोड़ भी हैं जहां विशेष सावधानी रखनी होगी.
आज की तिथि और श्राद्ध का नियम | Tithi and Shradh Rules
पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म का निर्धारण पूर्वज की मृत्यु तिथि के आधार पर किया जाता है, अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के अनुसार नहीं. आज 5 अक्टूबर को दिनभर आश्विन कृष्ण दशमी तिथि प्रभावी रहेगी, जो 6 अक्टूबर की सुबह तड़के 02 बजकर 08 मिनट तक चलेगी. जिन पितरों का निधन किसी भी पक्ष की दशमी तिथि को हुआ हो, उनका पार्वण श्राद्ध, पिंडदान और ब्राह्मण भोज आज ही के दिन आयोजित किया जाएगा. चूंकि श्राद्ध के लिए दिन का समय (विशेष रूप से कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल) शास्त्रसम्मत माना गया है, इसलिए रात में तिथि समाप्त होने की सूचना देखकर श्राद्ध को कल पर टालने की भूल न करें. परिवार की परंपरा के अनुसार आज ही दोपहर में तर्पण और पिंडदान संपन्न करें.
- तिथि: आश्विन कृष्ण दशमी (6 अक्टूबर तड़के 02:08 / 02:09 बजे तक)
- पक्ष: कृष्ण पक्ष (पितृपक्ष महालय)
- वार: सोमवार (सोमवार व्रत एवं शिव पूजन का दिन)
- विक्रम संवत: 2083 | शक संवत: 1948
इंदिरा एकादशी व्रत का संशय और समाधान | Indira Ekadashi Vrat Confusion
पंचांग में दशमी तिथि की समाप्ति 24 घंटे के चक्र से बाहर यानी मध्यरात्रि के बाद तड़के 2 बजकर 9 मिनट पर दर्ज है. अक्सर 24 से बड़ी संख्या या देर रात का समय देखकर श्रद्धालु यह मान लेते हैं कि एकादशी सोमवार को ही है, जबकि यह धारणा पूरी तरह गलत है. सूर्योदयकालीन उदयातिथि के नियम के अनुसार, एकादशी तिथि का सूर्योदय 6 अक्टूबर (मंगलवार) को होगा. इसलिए इंदिरा एकादशी का निर्जला या फलाहार व्रत आज नहीं, बल्कि कल यानी मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा. आज का दिन केवल दशमी श्राद्ध और शिव साधना के लिए निर्धारित है, दोनों अनुष्ठानों के दिन और विधान पूरी तरह भिन्न हैं.
- दशमी श्राद्ध: आज, 5 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
- इंदिरा एकादशी व्रत: कल, 6 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
- एकादशी तिथि का प्रारंभ: 6 अक्टूबर की सुबह 02:09 बजे से
नक्षत्र और चंद्र गोचर की स्थिति | Nakshatra and Moon Transit
आज रात 11 बजकर 10 मिनट तक अत्यंत शुभ और कल्याणकारी पुष्य नक्षत्र प्रभावी रहेगा, जिसे वैदिक ज्योतिष में सभी 27 नक्षत्रों का राजा माना गया है. इसके बाद गंडमूल संज्ञक आश्लेषा नक्षत्र की शुरुआत होगी. चंद्रमा आज पूरे 24 घंटे अपनी स्वराशि कर्क में गोचर करेंगे. यहां यह समझना अनिवार्य है कि रात 11:10 बजे पुष्य नक्षत्र समाप्त होकर आश्लेषा नक्षत्र भले लग जाए, लेकिन चंद्र राशि नहीं बदलेगी; चंद्रमा कर्क में ही रहेंगे. नक्षत्र और राशि पंचांग की दो स्वतंत्र गणनाएं हैं. रात 11:10 बजे के बाद गंडमूल नक्षत्र लगने के कारण उस समय जन्मे शिशुओं की मूल शांति पूजा का विचार किया जाएगा.
- वर्तमान नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र (रात 11:10 बजे तक)
- आगामी नक्षत्र: आश्लेषा नक्षत्र (रात 11:10 बजे से, गंडमूल आरंभ)
- चंद्र राशि: कर्क राशि (दिन-रात स्थिर)
- सूर्य राशि: कन्या राशि (दक्षिणायन, दक्षिण गोल)
शुभ मुहूर्त और श्राद्ध की समय-सारणी | Auspicious Timings and Shradh Muhurat
यद्यपि पुष्य नक्षत्र का प्रभाव दिनभर है, फिर भी किसी मांगलिक कार्य या धार्मिक अनुष्ठान के लिए सटीक मुहूर्त का चयन अनिवार्य है. श्राद्ध कर्म के लिए शास्त्रों में दोपहर का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है. आज दिल्ली पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा. हालांकि, इसी दौरान यमगण्ड भी दोपहर 12 बजकर 09 मिनट तक सक्रिय रहेगा. दोनों के एक साथ पड़ने के कारण अभिजीत की संपूर्ण अवधि को पूरी तरह दोषमुक्त नहीं माना जा सकता, इसलिए बड़े संस्कारों के लिए सर्वार्थ सिद्धि या विजय मुहूर्त को प्राथमिकता दें.
- कुतुप मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 01:16 बजे से दोपहर 02:01 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त (श्राद्ध हेतु): दोपहर 02:01 बजे से दोपहर 02:47 बजे तक
- अपराह्न काल (तर्पण-पिंडदान): दोपहर 02:47 बजे से शाम 05:04 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45:53 से दोपहर 12:33:02 तक
- सर्वार्थ सिद्धि योग: सुबह 06:17 बजे से रात 11:09 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:08 बजे से दोपहर 02:55 बजे तक
- अमृत काल: शाम 05:01 बजे से शाम 06:33 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:44 बजे से सुबह 05:32 बजे तक
अशुभ काल, भद्रा और राहुकाल | Inauspicious Timings, Bhadra and Rahukaal
किसी भी नए निवेश, यात्रा या शुभ अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले दिन के अशुभ चौघड़ियों और वर्जित समय का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है. आज सुबह 07:44 बजे से 09:12 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसमें कोई भी नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए. इसके अतिरिक्त दोपहर 02:58 बजे (कुछ पंचांगों में दोपहर 03:01 बजे वणिज करण समाप्ति के बाद) भद्रा यानी विष्टि करण का प्रवेश होगा, जो देर रात 02:08 बजे तक चलेगा. भद्रा काल में शुभ और मांगलिक कार्यों का निषेध रहता है.
- राहुकाल: सुबह 07:44:16 से सुबह 09:12:40 तक (इस दौरान नया काम न करें)
- यमगण्ड: सुबह 10:41:04 से दोपहर 12:09:27 तक
- गुलिक काल: दोपहर 01:37:51 से दोपहर 03:06:15 तक
- दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:33:02 से 01:20:11 तक तथा दूसरा दुर्मुहूर्त दोपहर 02:54:28 से 03:41:37 तक
- भद्रा (विष्टि करण): दोपहर 02:58 (या 03:01) बजे से अगले दिन तड़के 02:08 बजे तक
- दिशाशूल: पूर्व दिशा (यदि पूर्व दिशा में यात्रा आवश्यक हो तो दर्पण देखकर या दूध पीकर प्रस्थान करें)
सूर्य और चंद्र की स्थिति | Sun and Moon Timings
पंचांगीय समय के अनुसार आज सूर्योदय सुबह 06:15 बजे (स्थान भेद से 06:00 बजे) और सूर्यास्त शाम 06:03 बजे (स्थान भेद से 05:52 बजे) होगा. चंद्रास्त दोपहर 02 बजकर 46 मिनट पर हो जाएगा. आज का चंद्रोदय मध्यरात्रि के बाद यानी 6 अक्टूबर की रात 01 बजकर 41 मिनट (स्थान भेद से 12:35 बजे) पर होगा. इसे 5 अक्टूबर की शाम का चंद्रोदय समझने की भूल न करें.
- सूर्योदय: सुबह 06:15 बजे
- सूर्यास्त: शाम 06:03 बजे
- चंद्रास्त: दोपहर 02:46:59 बजे
- चंद्रोदय: 6 अक्टूबर तड़के 01:41 बजे
आज के पंचांग का सार (Aaj Ka Panchang)
5 अक्टूबर 2026 का पंचांग धार्मिक साधना और पितृ ऋण से मुक्ति के लिए बेहद पावन अवसर प्रदान कर रहा है. आज दशमी तिथि वाले पितरों का श्राद्ध कुतुप और रौहिण मुहूर्त में संपन्न करना श्रेयस्कर रहेगा. पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग की उपस्थिति के बावजूद दोपहर के समय भद्रा और यमगण्ड का प्रभाव रहने के कारण महत्वपूर्ण लौकिक कार्यों में पंचांग शुद्धि का ध्यान रखें. वहीं व्रत रखने वाले श्रद्धालु स्पष्ट समझ लें कि इंदिरा एकादशी का व्रत मंगलवार, 6 अक्टूबर को ही मान्य होगा. आज का दिन भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र के जप और पितरों के निमित्त अन्न-जल दान करने के लिए सर्वोत्तम है.
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Disclaimer: यह पंचांग एवं ज्योतिषीय विवरण पारंपरिक हिंदू पंचांग पद्धतियों, वैदिक खगोलीय गणनाओं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. भौगोलिक अक्षांश और देशांतर के आधार पर विभिन्न शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्तों के समय में कुछ मिनटों का स्थानीय अंतर हो सकता है. भारत एक्सप्रेस इस सामग्री की किसी भी प्रकार की नैतिक अथवा विधिक पुष्टि नहीं करता है और न ही किसी अंधविश्वास को बढ़ावा देता है. किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान, व्रत निर्णय अथवा मांगलिक कार्य से पूर्व अपने स्थानीय पुरोहित या ज्योतिर्विद से परामर्श अवश्य लें.
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