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अंबाजी मंदिर में खजाने से चोरी, वैष्णो देवी में चढ़ावे की चांदी विवाद पहुंचा अदालत

Temple donation controversy: गुजरात के अंबाजी मंदिर में खजाने से नोटों का बंडल चुराते कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा गया, जबकि वैष्णो देवी में चढ़ाई गई कथित ₹500 करोड़ की चांदी को लेकर मामला कोर्ट पहुंच गया. दोनों घटनाओं ने मंदिरों में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को लेकर नई बहस छेड़ दी है.

Temple donation controversy

Temple donation controversy

Temple donation controversy: देश के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़ी घटनाओं ने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ मंदिरों में चढ़ावे और उसकी पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है. एक ओर गुजरात के प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर में खजाने से नोटों का बंडल चुराते हुए एक कर्मचारी रंगे हाथों पकड़ा गया, वहीं दूसरी ओर श्री माता वैष्णो देवी दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई कथित चांदी की शुद्धता को लेकर मामला अदालत तक पहुंच गया है.

अंबाजी मंदिर में खजाने से चोरी का मामला

गुजरात के बनासकांठा स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी मंदिर में मंदिर के खजाने से नोटों का बंडल चुराने की कोशिश करते हुए एक कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ लिया गया. बताया जा रहा है कि घटना मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई, जिसके बाद मंदिर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया. मामले की जांच जारी है और प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि चोरी की यह घटना अकेले की गई या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी शामिल है.

वैष्णो देवी में चढ़ावे की चांदी पर उठे सवाल

उधर, जम्मू स्थित श्री माता वैष्णो देवी दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई कथित ₹500 करोड़ मूल्य की चांदी को लेकर विवाद गहरा गया है. अधिवक्ता दीपक शर्मा की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि इस चांदी में केवल लगभग ₹30 करोड़ की असली चांदी ही मौजूद है. इस मामले पर सुनवाई करते हुए जम्मू की अदालत ने जांच कर रही क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को 29 जुलाई को सभी संबंधित रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है.

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आस्था के साथ पारदर्शिता भी जरूरी

दोनों घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के चढ़ावे और मंदिर खजाने की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है. मंदिरों में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान और बहुमूल्य वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा, नियमित ऑडिट और पारदर्शी प्रबंधन न केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है.

भारत एक्सप्रेस



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