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भक्ति में डूबा चंडीगढ़: भागवत कथा के समापन पर छलके बी प्राक के आंसू, अगले साल राम कथा का ऐलान

Chandigarh News: चंडीगढ़ में आयोजित सात दिवसीय श्री भागवत कथा के समापन पर पंजाबी गायक बी प्राक भावुक हो गए. कथावाचक इंद्रेश महाराज के सामने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने क्षमा मांगी और अगले वर्ष विशाल राम कथा कराने का संकल्प लिया.

B Praak bhagwat katha chandigarh

Chandigarh News: चंडीगढ़ में आयोजित सात दिवसीय श्री भागवत कथा का समापन बेहद भक्तिमय और भावुक कर देने वाले माहौल में हुआ. इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां भजन-कीर्तन पर झूमते भक्तों के साथ-साथ प्रसिद्ध सिंगर बी प्राक भी भक्ति के रंग में पूरी तरह लीन नजर आए.

कथा के अंतिम दिन मशहूर गायक बी प्राक कथावाचक इंद्रेश महाराज के समक्ष अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और भावुक होकर कहा कि गुरु जी हमसे कोई गलती हुई हो तो माफ करना. सात दिनों तक चले इस आयोजन में रोज 15 से 20 हजार श्रद्धालु पहुंचे. इंद्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेम, भक्ति और अहंकार छोड़ने का संदेश दिया, वहीं बी प्राक ने अपने दादाजी की प्रेरणा से अगले वर्ष नौ दिवसीय राम कथा आयोजित करने की घोषणा की.

भक्ति के रंग में डूबा चंडीगढ़, भागवत कथा का समापन

चंडीगढ़ में आयोजित सात दिवसीय श्री भागवत कथा का समापन श्रद्धा, उल्लास और भावुक कर देने वाले पलों के साथ हुआ. आयोजन स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर झूमते भक्त, हाथ जोड़कर कथा सुनती महिलाएं और भावुक होते श्रद्धालुओं का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और आसपास के इलाकों से हर दिन लगभग 15 से 20 हजार लोग इस कथा का आनंद लेने पहुंचे.

कथावाचक के सामने भावुक हुए बी प्राक, मांगी माफी

धार्मिक आयोजन के समापन पर बॉलीवुड व पंजाबी सिंगर बी प्राक अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके. कथावाचक पूज्य इंद्रेश महाराज के सामने भावुक संबोधन में उन्होंने कहा कि कथा समाप्त होने पर उनका दिल उदास हो जाता है. बी प्राक ने विनम्रता से कहा, ‘गुरु जी, हमसे कोई गलती हुई हो तो माफ करना.’ उन्होंने श्रद्धालुओं से कथा की बातों को केवल सुनने तक सीमित न रखकर अपने जीवन में उतारने की अपील की.

इन्द्रेश महाराज ने दिया प्रेम, धैर्य और अहंकार त्यागने का संदेश

कथावाचक इंद्रेश महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में प्रतीक्षा करना मीराबाई से सीखना चाहिए. उन्होंने महाभारत में अर्जुन का सारथी बने श्रीकृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान सब कुछ करते हुए भी कभी श्रेय नहीं लेते. मनुष्य को भी अपना अहंकार छोड़कर दूसरों को सम्मान देना चाहिए. कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक झांकी और छोटे तालाब में नौका विहार का विशेष दृश्य भी आयोजित किया गया.

दादाजी से मिली प्रेरणा, अगले साल होगी नौ दिवसीय राम कथा

बी प्राक ने बताया कि लगातार तीसरे साल इस तरह का आयोजन किया जा रहा है, जिसकी प्रेरणा उन्हें अपने दादाजी से मिली है. कथा के अंतिम दिन बी प्राक और इंद्रेश महाराज ने मिलकर भजन गाए और श्रद्धालुओं के साथ डांडिया नृत्य भी किया. इस दौरान युवाओं और परिवारों की जबरदस्त भागीदारी देखने को मिली. बी प्राक ने घोषणा की कि अगले वर्ष इसी तरह नौ दिवसीय भव्य राम कथा का आयोजन किया जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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