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अनोखी परंपरा: इस मंदिर में फूल-प्रसाद नहीं, भगवान को भेंट की जाती हैं घड़ियां; जानिए रहस्य

Temple Offer Clock: मध्य प्रदेश के उज्जैन के पास स्थित काल भैरव मंदिर में भक्त प्रसाद के रूप में घड़ियां चढ़ाते हैं. मान्यता है कि यहां घड़ी अर्पित करने से बुरा समय दूर होता है और जीवन में अच्छे दिनों की शुरुआत होती है.

Clock offer temple tradition

Clock offer temple tradition

Temple Offer Clock: भारत के मंदिरों में अनोखी परंपराएं तो आपने बहुत देखी होंगी—कहीं भगवान को वाइन का भोग लगता है, तो कहीं चॉकलेट्स का। लेकिन क्या आप एक ऐसे मंदिर के बारे में जानते हैं जहाँ भक्त भगवान के चरणों में घड़ियां चढ़ाते हैं? जी हां! इस अनोखे मंदिर में लोग मिठाई या फूल नहीं, बल्कि कलाई और दीवार घड़ियां लेकर पहुंचते हैं. माना जाता है कि यहां हाजिरी लगाने से इंसान का बुरा वक्त भी अच्छे वक्त में बदल जाता है. आइए जानते हैं इस दिलचस्प मंदिर के पीछे का रहस्य.

किस जगह स्थित है, यह अनोखा मंदिर?

यह अनोखा मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन से करीब 40 किलोमीटर दूर, उन्हेल और महिदपुर के बीच सड़क के किनारे है. यहाँ काल भैरव बाबा की पूजा की जाती है. इस मंदिर की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहाँ मंदिर के अंदर से लेकर बाहर पेड़ों तक पर आपको सिर्फ सैकड़ों-हजारों घड़िया ही घड़ियां लटकी हुई दिखाई देंगी.

घड़ियों को दीवारों पर लगाया जाता

यहाँ दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर दीवार घड़ियाँ और कलाई घड़ियां चढ़ाने आते हैं. यही वजह है कि मंदिर के अंदर और बाहर के पेड़ों पर आपको हर तरफ सैकड़ों-हजारों घड़ियां ही घड़ियां लटकी हुई दिखाई देती हैं.

कहां से शुरू हुई यह परंपरा?

यहां के लोगों का मानना है कि सालों पहले एक आदमी ने इस मंदिर में कोई मन्नत मांगी थी. जब उसकी इच्छा पूरी हो गई, तो उसने खुशी में भगवान को एक घड़ी चढ़ाई. बस, तभी से यह सिलसिला शुरू हो गया और आज हजारों लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर इसी तरह घड़ी चढ़ाते हैं.

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घड़ी ही क्यों चढ़ाते

भक्तों का मानना है कि घड़ी सीधे तौर पर हमारे ‘वक्त’ से जुड़ी है. लोगों का भरोसा है कि यहां घड़ी चढ़ाने से उनका बुरा समय टल जाता है और अच्छा वक्त शुरू हो जाता है. वैसे भी, भारतीय संस्कृति में समय (काल) को भगवान का ही एक रूप माना गया है.

इन मंदिरों की सबसे मजेदार बात यह है कि यहां आपको चारों तरफ सिर्फ घड़ियां ही घड़ियां दिखाई देंगी. कई बार जब मंदिर के अंदर घड़ियां टांगने की जगह कम पड़ जाती है, तो भक्त पास के पेड़ों पर ही उन्हें बांध देते हैं. धीरे-धीरे यह अनोखा तरीका इतना मशहूर हो गया कि आज ये मंदिर इसी परंपरा की वजह से पूरी दुनिया में जाने जाते हैं.

भारत एक्सप्रेस



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