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जानिए, हमेशा भगवान विष्णु के चरणों के पास क्यों बैठे नजर आती हैं देवी लक्ष्मी? Diwali पर पूजन का विशेष महत्‍व

महालक्ष्मी अपने पति परमेश्वर भगवान विष्णु के चरणों के पास बैठती हैं, जो समर्पण, सेवा और शक्ति के एक साथ होने का प्रतीक है. यह दर्शाता है कि धन (लक्ष्मी) का उचित उपयोग भगवान विष्णु के मार्गदर्शन में ही संभव है, और समृद्धि का वास विनम्रता, कर्म और धर्म के साथ होता है.

महालक्ष्मी भगवान विष्णु के पैरों के पास.

Deepawali Rituals: इस बार दीपावली 20 अक्टूबर को है. इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. महालक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की देवी हैं और भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता है. ग्रंथों, चित्रों और मंदिरों में एक तस्वीर और मूर्ति अक्सर दिखाई देती है, जिसमें महालक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों के पास बैठी हुई हैं. लक्ष्मी-विष्णु की इस मुद्रा में जीवन प्रबंधन के महत्वपूर्ण सूत्र छिपे हैं. इन सूत्रों को अपनाने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं.

समर्पण, सेवा और शक्ति का प्रतीक

महालक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों के पास इसलिए बैठती हैं क्योंकि यह समर्पण, सेवा और शक्ति के एक साथ होने का प्रतीक है. यह दर्शाता है कि धन (लक्ष्मी) का उचित उपयोग भगवान विष्णु के मार्गदर्शन में ही संभव है, और समृद्धि का वास विनम्रता, कर्म और धर्म के साथ होता है.

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समर्पण और सेवा: देवी लक्ष्मी, जो धन और समृद्धि की देवी हैं, भगवान विष्णु की पत्नी हैं. उनके चरणों के पास बैठना उनके समर्पण और सेवा का प्रतीक है, यह दर्शाता है कि वे भगवान की सेवा में लीन रहती हैं.

शक्ति का संगम: भगवान विष्णु को पालनकर्ता और महालक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है. वे दोनों एक दूसरे के पूरक हैं और एक साथ मिलकर जीवन को पूर्ण करते हैं.

ग्रहों का प्रभाव: एक मान्यता के अनुसार, महिला के हाथ पर बृहस्पति ग्रह और पुरुष के पैर पर शुक्र ग्रह का प्रभाव होता है. जब लक्ष्मी विष्णु के चरणों के पास बैठती हैं, तो बृहस्पति और शुक्र के मिलन से शुभता और धन-समृद्धि का संचार होता है.

अलक्ष्मी को दूर रखना: एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी लक्ष्मी की एक बहन अलक्ष्मी (दुर्भाग्य की देवी) हैं. लक्ष्मी जी अपने पति के चरणों की सफाई करती रहती हैं ताकि अलक्ष्मी (दुर्भाग्य की देवी) वहाँ प्रवेश न कर सके.

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धार्मिक और दार्शनिक सीख: यह चित्र यह भी सिखाता है कि धन को सिर पर नहीं, बल्कि चरणों में स्थान देना चाहिए. जब धन को विनम्रता से स्वीकार किया जाता है और उसका उपयोग धर्म और सत्कर्म में किया जाता है, तभी वह लंबे समय तक टिकता है.

कर्म का महत्व: यह दर्शाता है कि लक्ष्मी केवल भाग्य से नहीं आतीं, बल्कि श्रम, निष्ठा और धर्म के साथ किए गए कर्मों पर निर्भर करती हैं. इसलिए, कर्म करते रहना आवश्यक है, केवल भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए.

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