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सिर्फ एक प्रसाद और चट मंगनी पट ब्याह, जयपुर के इस मंदिर में 250 सालों से दूर हो रहा है विवाह का हर दोष

जयपुर की नाहरगढ़ पहाड़ियों की तलहटी में स्थित नहर वाले गणेश मंदिर का इतिहास 250 साल पुराना है. गणेश चतुर्थी से पहले मनाए जाने वाले सिंजारा उत्सव और यहां मिलने वाले चमत्कारी सिंदूर-मेहंदी के प्रसाद के बारे में विस्तार से पढ़ें.

Jaipur Ganesh temple

जयपुर का ये गणेश मंदिर है बेहद खास

Jaipur Ganesh Temple: देशभर में भदवान गणेश के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं और बात जब कुछ खास दरबारों की हो, तो राजस्थान के जयपुर का जिक्र भी काफी किया जाता है. यहां का ‘नहर के गणेश जी’ का मंदिर किसी चमत्कार से कम नहीं माना जाता. नाहरगढ़ की पहाड़ियों की गोद में बसा यह करीब 250 साल पुराना मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र है, खासकर गणेश चतुर्थी और उससे जुड़े आयोजनों के दौरान. आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक मंदिर की कुछ खास बातें जो इसे बाकियों से अलग बनाती हैं.

दाहिनी सूंड वाले चमत्कारी बप्पा

देशभर में आपको भगवान गणेश के हजारों मंदिर मिल जाएंगे लेकिन बहुत कम जगह ऐसी हैं जहां बप्पा की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई हो. जयपुर के इस नहर वाले मंदिर में जो प्रतिमा है, वह दक्षिणमुखी या कहें कि दाहिनी सूंड वाली है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इन रूपों को साक्षात ‘सिद्धिविनायक’ माना जाता है. अगर आप जीवन में सुख-समृद्धि, यश, धन और सफलता चाहते हैं, तो दाईं सूंड वाले गणपति की पूजा सबसे उत्तम फलदायी मानी जाती है. यही वजह है कि यहां हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी झोली में खुशियां भरने की मन्नत लेकर आते हैं.

सिंजारा उत्सव और मोदकों की भव्य झांकी

गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले इस मंदिर में ‘सिंजारा उत्सव’ का बहुत भव्य आयोजन होता है. इस दिन बप्पा का खास श्रृंगार किया जाता है. उन्हें बेहद सुंदर पोशाक और पारंपरिक साफा पहनाया जाता है. इस उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होती है मोदकों की झांकी, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है. अनगिनत मोदकों से सजी यह झांकी इस पावन पर्व की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है.

क्यों खास है यहां की मेहंदी और सिंदूर?

सिंजारा उत्सव के दौरान बप्पा को मेहंदी और सिंदूर अर्पित करने की पुरानी परंपरा है. पूजा के बाद यही सिंदूर और मेहंदी भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में बांटी जाती है.

मंदिर के महंत पंडित जय शर्मा बताते हैं कि इस प्रसाद को पाने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आते हैं. मान्यता है कि नहर वाले गणेश जी का यह सिंदूर और मेहंदी उन लोगों के लिए वरदान है, जिनके मांगलिक कार्यों या विवाह में अड़चनें आ रही हैं. ऐसा माना जाता है कि इसे लगाने से शादी और प्रेम संबंधों में आ रही सारी रुकावटें दूर हो जाती हैं और दांपत्य जीवन खुशहाल बनता है.

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जयपुर के तीन मंदिर जो हैं मशहूर

वैसे तो राजस्थान में कई जगहों पर इस तरह की परंपराएं हैं, लेकिन जयपुर के तीन ऐसे मंदिर हैं जो इस खास सिंदूर-मेहंदी के प्रसाद के लिए सबसे ज्यादा जाने जाते हैं:

नहर वाले गणेश मंदिर (ब्रह्मपुरी)

मोती डूंगरी गणेश मंदिर

श्री गढ़ गणेश मंदिर

अखंड सौभाग्य और सुखी जीवन की कामना के लिए इन तीनों ही दरबारों में सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है. इस बार अगर आप भी बप्पा के दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो जयपुर के इन पावन मंदिरों की यात्रा करना बिल्कुल न भूलें.

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-भारत एक्सप्रेस



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