Durga Puja Special: झारखंड के गोला में स्थित सोनाठाकुर दुर्गा मंदिर अपनी अनोखी पूजा परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. जहां आमतौर पर दस दिनों तक दुर्गा पूजा मनाई जाती है, वहीं इस मंदिर में पूजा 13 दिनों तक चलती है. प्रतिमा का विसर्जन दशमी के बजाय त्रयोदशी यानी 13वें दिन होता है.
63 सालों की परंपरा
सोनाठाकुर दुर्गा मंदिर की स्थापना 1965 में हुई थी. कहा जाता है कि भट्टाचार्य परिवार के मुखिया सोना ठाकुर को स्वप्न में मां दुर्गा ने मंदिर बनाने और पूजा करने का आदेश दिया था. परिवार ने उसी आदेश को मानकर मंदिर का निर्माण कराया और तब से लगातार पूजा की जा रही है. यह मंदिर न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है.
त्रयोदशी पर विशेष विसर्जन
मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां विसर्जन दशमी के बजाय त्रयोदशी को होता है. इस दिन प्रतिमा का नगर भ्रमण किया जाता है और पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बनता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले दशमी पर जबरन विसर्जन कराने का प्रयास हुआ था, जिससे श्रद्धालु आहत हुए थे. विसर्जन के दूसरे दिन ही थाना के अधिकारी के आंखों से खून निकलने लगा और आंखें चली गयी. तब से इस परंपरा को सख्ती से निभाया जाता है.
पुजारियों और श्रद्धालुओं का संगम
मंदिर में पूजा का संचालन हर साल पश्चिम बंगाल से आने वाले पुजारियों द्वारा किया जाता है. भट्टाचार्य परिवार के सदस्य भी पूजा का आयोजन अपने निजी खर्च से करते हैं. दुर्गा पूजा के दौरान यह मंदिर न केवल गोला बल्कि आसपास के जिलों और राज्यों से आने वाले हजारों श्रद्धालुओं का आकर्षण बन जाता है.
सोनाठाकुर दुर्गा मंदिर सिर्फ पूजा का स्थल नहीं है, बल्कि यह आस्था, परंपरा और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है. 63 वर्षों से चली आ रही पूजा ने मंदिर और क्षेत्र को एकजुट रखा है. आज यह मंदिर दुर्गा पूजा के समय श्रद्धालुओं के लिए एक विशेष केंद्र बन गया है, जहां हर कोई मां दुर्गा की आराधना करके अपने जीवन को धन्य मानता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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