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Janmashtami 2025: श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर इस्कान में चांदी के 108 कलश से महाभिषेक, 15 अगस्त से मुहूर्त शुरू

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2025 इस बार 16 अगस्त को मनाई जाएगी. ज्योतिर्विदों के अनुसार अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 12:58 बजे से 16 अगस्त की रात 10:29 बजे तक रहेगी, जबकि रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को रहेगा. इस्कान मंदिर में 108 चांदी कलश से महाभिषेक, 56 भोग और महाआरती का आयोजन होगा.

Janmashtami 2025: भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस वर्ष ज्योतिर्विदों के अनुसार जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा. हालांकि अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार नहीं बन रहा है, फिर भी तिथि के आधार पर यह दिन उपयुक्त माना गया है.

आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार अष्टमी तिथि 15 अगस्त की रात 12:58 बजे से 16 अगस्त की रात 10:29 बजे तक रहेगी, जिसके दौरान 17 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र आएगा लेकिन तब दशमी तिथि होगी. इसी कारण अष्टमी के मतावलंबी 16 अगस्त को और रोहिणी के मतावलंबी 17 अगस्त को पर्व मनाएंगे.

इस्कान मंदिर में विशेष आयोजन

इस्कान मंदिर में इस बार भगवान श्रीकृष्ण के लिए वृंदावन से विशेष पोशाक मंगाई गई है. रात 11 बजे से महाभिषेक की शुरुआत होगी, जिसमें चांदी के 108 कलशों में भरे 21 प्रकार के द्रव्यों से भगवान का अभिषेक किया जाएगा. इसके बाद 56 भोग अर्पित होंगे और मध्यरात्रि 12 बजे महाआरती के साथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा. श्रीराधा रमण मंदिर, रूप गौड़ीय मठ, निम्बार्क आश्रम सहित अन्य सभी मंदिरों और घरों में भी इसी तरह भक्ति-भाव से कार्यक्रम होंगे.

जन्माष्टमी व्रत का महत्व

पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय बताते हैं कि जन्माष्टमी व्रत का फल एक हजार एकादशी के समान होता है. भविष्य पुराण के अनुसार यह व्रत अकाल मृत्यु से बचाता है और अहंकार का त्याग कर मन को शुद्ध करता है.

पूजन विधि

जन्माष्टमी के दिन प्रातः स्नान कर संकल्प लें, दिनभर व्रत रखें और श्रीकृष्ण नाम का जप करें. सूर्यास्त के बाद भगवान की प्रतिमा या चित्र को नए वस्त्र पहनाकर पालने में विराजमान करें. पंचामृत में तुलसी डालकर अभिषेक करें और माखन-मिश्री, फल, मिष्ठान का भोग लगाएं. माता देवकी, वसुदेव, बलराम, नंद बाबा, यशोदा और लक्ष्मी माता का नाम लेकर पूजा करें.

मध्यरात्रि में भगवान के जन्मोत्सव के साथ आरती, भजन-कीर्तन और सोहर गाकर उल्लास मनाएं. यह दिन भक्तों के लिए केवल उत्सव ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और भक्ति भाव को जगाने का अवसर भी है.

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भारत एक्सप्रेस



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