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Mangala Gauri Vrat 2025: 14 या 15 जुलाई, कब है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Mangala Gauri Vrat 2025: श्रावण मास का पहला मंगला गौरी व्रत 15 जुलाई 2025 को रखा जाएगा. यह व्रत सुहागिनों और कुंवारी कन्याओं द्वारा सुखद वैवाहिक जीवन, योग्य वर और संतान प्राप्ति के लिए किया जाता है. जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त के बारे में.

Mangala Gauri Vrat 2025: 14 या 15 जुलाई, कब है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत? जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त- भारत एक्सप्रेस

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Mangala Gauri Vrat 2025: मंगलवार को श्रावण मास का पहला मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। इस व्रत को विशेष रूप से कन्याएं और सुहागिन स्त्रियां मां गौरी की कृपा पाने के लिए करती हैं ताकि उन्हें देवी की कृपा से योग्य वर और सुखमय वैवाहिक जीवन प्राप्त हो.

कब है सावन का पहला मंगला गौरी व्रत?

दृक पंचांग में इसके नियम से लेकर शुभ मुहूर्त का उल्लेख है. मंगला गौरी व्रत सावन मास के प्रत्येक मंगलवार को किया जाता है. यानी इस साल मंगल गौरी 15 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा. यह व्रत विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है. यह वैवाहिक जीवन में सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि लाने वाला माना जाता है.

कुंवारी लड़कियां मनचाहा वर पाने के लिए करें व्रत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से सुहागिन महिलाओं को भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने और शीघ्र विवाह के लिए यह व्रत कर सकती हैं. जिन दंपत्तियों को संतान सुख नहीं मिल पा रहा है, उनके लिए भी यह व्रत लाभकारी माना जाता है.

मंगला गौरी व्रत का पूजा विधि

व्रत को रखने के लिए आप सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर साफ वस्त्रों को धारण करें, फिर मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें. एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर कलश स्थापना करें और उसमें आम के पत्ते और नारियल रखें. इसके बाद मां गौरी की स्थापना कर उन्हें हल्दी, कुमकुम, चूड़ी, बिंदी, वस्त्र और सुहाग की सामग्री चढ़ाएं. फिर निम्न मंत्र के साथ व्रत का संकल्प लें और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद में मां गौरी की व्रत कथा सुनें, साथ ही मां की आरती करें और “ऊँ गौरी त्रिपुरसुंदरी नमः” मंत्र का जाप करें. पूजन के पश्चात माता को 16 प्रकार की वस्तुएं चढ़ाएं.

पूजा कथा जरूर सुनें

इसके अलावा 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज-धान्य चढ़ाएं. पूजन समाप्त होने के बाद आरती का आचमन करें और आसन को प्रणाम करके पूजा स्थल से उठें. जो महिलाएं उपवास का पालन नहीं कर सकतीं, वे कम से कम पूजा कथा को जरूर सुनें.

मंगला गौरी व्रत का शुभ मुहूर्त

श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को सूर्य देव मिथुन राशि में रहेंगे, वहीं चंद्रमा 11 बजकर 58 मिनट तक कुंभ राशि में रहेंगे. इसके बाद मीन राशि में गोचर करेंगे. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर शाम को 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा. इस दिन राहुकाल शाम के 03 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 05 बजकर 37 मिनट तक रहेगा.

-भारत एक्सप्रेस 



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