Pitru Paksha 2025: सनातन धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की प्राप्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. भाद्रपद मास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाला यह पखवाड़ा पूरी तरह से श्राद्ध और पिंडदान के कर्मों को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दौरान किया गया तर्पण और दान सीधे पितरों तक पहुंचता है और उन्हें मुक्ति मिलती है.
इसी परंपरा के बीच राजस्थान के अजमेर में स्थित पुष्कर सरोवर को सबसे खास स्थान माना जाता है. यहां एक बार किए गए श्राद्ध और पिंडदान से व्यक्ति अपने सात कुल और पांच पीढ़ियों तक के पूर्वजों को शांति और मोक्ष दिला सकता है. यही वजह है कि पितृ पक्ष के दौरान यह तीर्थ नगरी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से भर जाती है.
पुष्कर सरोवर क्यों है इतना विशेष?
पुष्कर को हिंदू धर्म में ‘तीर्थराज’ यानी तीर्थों का राजा कहा गया है. यहां स्थित भगवान ब्रह्मा का मंदिर दुनिया में अद्वितीय है, जो इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है. सरोवर की उत्पत्ति को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि यह पवित्र जलस्रोत भगवान विष्णु की नाभि से निकला था. वहीं एक अन्य कथा के अनुसार, स्वयं ब्रह्मा जी ने जब पृथ्वी पर कमल का फूल गिराया तो उस स्थान पर यह सरोवर प्रकट हुआ. इन्हीं मान्यताओं के कारण पुष्कर झील को मोक्षदायी और अद्वितीय माना जाता है.
पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण का महत्व हर शास्त्र में वर्णित है. माना जाता है कि इस दौरान पूर्वज अपने वंशजों से तर्पण की प्रतीक्षा करते हैं. पुष्कर सरोवर इस अनुष्ठान के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है. यहां 52 घाट बने हुए हैं, जिन पर श्रद्धालु स्नान और पिंडदान करते हैं. विश्वास है कि इस जल में स्नान करने से न केवल पाप धुलते हैं, बल्कि पितरों की आत्मा को भी शांति मिलती है. यहां का दिव्य वातावरण हर व्यक्ति को गहन आध्यात्मिक अनुभव कराता है.
एक पिंडदान से 5 पीढ़ियों को मिलेगा मोक्ष
पुष्कर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां श्राद्ध करने से पांच पीढ़ियों तक के पितरों को मोक्ष मिलता है. अन्य तीर्थस्थलों पर यह परंपरा सीमित पीढ़ियों तक मानी जाती है, लेकिन पुष्कर का महत्व अनोखा है. इतिहास और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए यहीं पिंडदान और श्राद्ध किया था. इस वजह से इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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