Pitru Paksha Panchang: हिंदू पंचांग और सनातन परंपराओं के अनुसार, पितृ पक्ष का यह पावन समय पूर्वजों के प्रति सम्मान, श्रद्धांजलि और कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है. आगामी 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को पितृ पक्ष के अंतर्गत चतुर्दशी श्राद्ध मनाया जाएगा. कई क्षेत्रों और परंपराओं में इस दिन को घाट चतुर्दशी या घात चतुर्दशी श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है. आइए जानते हैं इस दिन के पंचांग, श्राद्ध के शुभ मुहूर्तों और धार्मिक अनुष्ठानों की पूरी जानकारी.
तिथि और चतुर्दशी श्राद्ध का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध विशेष रूप से उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु अचानक, दुर्घटना, हिंसा, आग, हथियार, डूबने या किसी अन्य असामान्य परिस्थिति में हुई हो. वहीं, जिन पूर्वजों की मृत्यु सामान्य रूप से हुई हो, उनका श्राद्ध चतुर्दशी के बजाय उनकी संबंधित तिथि पर करने की परंपरा मानी जाती है.
श्राद्ध के शुभ मुहूर्त: धार्मिक अनुष्ठानों और श्राद्ध कर्मों के लिए दिन के सही समय का होना आवश्यक है. दिल्ली में 9 अक्टूबर को कुतुप मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा. इसके पश्चात रौहिण मुहूर्त दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक और अपराह्न काल दोपहर 1:18 बजे से 3:38 बजे तक प्रभावी रहेगा. श्राद्ध कर्मों के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है.
तर्पण, पिंडदान और पंचबली की परंपरा
चतुर्दशी श्राद्ध के दिन पूर्वजों की शांति और स्मरण के लिए जल और काले तिल से तर्पण तथा चावल और आटे से बने पिंडों से पिंडदान किया जाता है. इसके अलावा, कुछ परंपराओं में पंचबली के तहत गाय, कौआ और कुत्ते को भोजन कराने के साथ-साथ ब्राह्मण को भोजन कराने की भी परंपरा निभाई जाती है. परिवार अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय पंचांग के नियमों का पालन करते हुए पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं.
- 9 अक्टूबर 2026 को पितृ पक्ष में कौन सा श्राद्ध किया जाएगा?
उत्तर: इस दिन चतुर्दशी श्राद्ध (घाट चतुर्दशी) किया जाएगा.
- चतुर्दशी श्राद्ध विशेष रूप से किसके लिए किया जाता है?
उत्तर: यह उन पूर्वजों के लिए किया जाता है जिनकी मृत्यु दुर्घटना, हिंसा या किसी असामान्य परिस्थिति में हुई हो.
- श्राद्ध कर्म के लिए ‘कुतुप मुहूर्त’ का समय क्या है?
उत्तर: कुतुप मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा.
- अपराह्न काल की अवधि क्या है?
उत्तर: अपराह्न काल दोपहर 1:18 से 3:38 बजे तक रहेगा.
- इस दिन तर्पण में मुख्य रूप से क्या अर्पित किया जाता है?
उत्तर: जल और काले तिल से तर्पण किया जाता है.
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