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अखाड़ा परिषद के सर्वमान्य अध्यक्ष हैं महंत रवींद्रपुरी महाराज, फर्जी दावों का पर्दाफाश

Akhada Parishad Controversy: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर भ्रम फैलाने वालों को करारा जवाब मिल गया है. शांतनु शुक्ल ने स्पष्ट किया कि निरंजनी अखाड़े के महंत रवींद्रपुरी महाराज ही सर्वमान्य अध्यक्ष हैं. जानिए फर्जी अखाड़ा परिषद का पूरा सच क्या है?

Akhada Parishad Controversy

Akhada Parishad Controversy: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर पिछले कुछ दिनों से फैलाई जा रही अफवाहों और भ्रामक खबरों का आज सबसे बड़ा पर्दाफाश हो गया है. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज के प्रचार-प्रसार प्रभारी शांतनु शुक्ल ने डंके की चोट पर यह साफ कर दिया है कि अखाड़ा परिषद के एकमात्र, वैधानिक और सर्वमान्य अध्यक्ष सिर्फ और सिर्फ निरंजनी अखाड़े के पूज्य महंत रवींद्रपुरी महाराज हैं. जो लोग फर्जी संगठन बनाकर खुद को अध्यक्ष बता रहे हैं, उनका सच अब पूरे देश के सामने आ चुका है.

स्व. नरेंद्र गिरि के बाद सर्वसम्मति से मिला था ताज

यह किसी से छिपा नहीं है कि ब्रह्मलीन स्वर्गीय नरेंद्र गिरिजी महाराज के साकेतवासी होने के बाद, अखाड़ा परिषद के महामंत्री और समूचे संत समाज ने सर्वसम्मति से यह बड़ी जिम्मेदारी निरंजनी अखाड़े के पूज्य रवींद्रपुरी महाराज को सौंपी थी. यह उन्हीं के कुशल नेतृत्व और प्रशासनिक क्षमता का कमाल था कि प्रयागराज का महाकुंभ इतना भव्य और सफल रहा. आज भी पूरा संत समाज उन्हीं के दिशा-निर्देशों पर चल रहा है.

‘फर्जी’ अखाड़ा परिषद बनाने वालों की खुली पोल

शांतनु शुक्ल ने सीधा प्रहार करते हुए कहा कि महानिर्वाणी अखाड़े के महंत ने एक असंवैधानिक और ‘फर्जी अखाड़ा परिषद’ का गठन कर लिया है, जिसकी कोई मान्यता नहीं है. उन्होंने बताया कि यह गुट अक्सर महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों से ठीक पहले ‘एक्टिव’ हो जाता है, ताकि भोले-भाले संतों, जनता और प्रशासन को गुमराह किया जा सके. लेकिन अब इनकी यह साजिश कामयाब नहीं होने वाली!

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पूरा संत समाज साथ, प्रशासन को ‘अलर्ट’

पूज्य रवींद्रपुरी महाराज (निरंजनी अखाड़ा) का दबदबा ऐसा है कि निर्मल अखाड़े और उदासीन अखाड़े के दोनों गुट पूरी तरह से उनके समर्थन में खड़े हैं. महाराज जी फिलहाल नासिक प्रवास पर हैं और जल्द ही हरिद्वार पहुंचने वाले हैं. शांतनु शुक्ल ने कुंभ मेला प्रशासन और राज्य सरकार से सीधी अपील की है कि वे ऐसे फर्जी और असंवैधानिक दावों पर बिल्कुल ध्यान न दें. सच्चाई यही है कि अखाड़ा परिषद की कमान पूरी तरह से पूज्य महंत रवींद्रपुरी महाराज के मजबूत हाथों में सुरक्षित है.



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