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सावन के पावन महीने में शिव-पार्वती की कृपा पाने का सुनहरा अवसर, जानिए क्या होता है भौम प्रदोष और जया पार्वती प्रदोष ?

सावन महीना हिंदू धर्म के लिए सबसे पावन महीना होता है. इस माह में खास करके भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

सावन महीना हिंदू धर्म के लिए सबसे पावन महीना होता है. इस माह में खास करके भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है. सावन में जिस मंगलवार को प्रदोष पड़ता है, उसी को भौम प्रदोष कहा जाता है. भगवान शिव की कृपा पाने के लिए लोग इस व्रत को करते हैं.

जया व्रत कब शुरू हो रहा है ?

मंगलवार को ही जया पार्वती व्रत शुरू हो रहा है. इस दिन सूर्य मिथुन राशि में ही बने रहेंगे और चंद्र देव मिथुन राशि से धनु राशि में चले जाएंगे. पंचांग के मुताबिक 7 जुलाई की रात में ही लगभग 11 बजकर 10 मिनट पर ही त्रयोदशी तिथि लग जाएगी. यह तिथि 9 जुलाई की रात 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगी और इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी. इसका शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 23 मिनट से 9 बजकर 24 मिनट तक ही रहेगा.

भौम प्रदोष का महत्व

भौम प्रदोष मंगलवार को पड़ता है. यह प्रदोष महादेव के साथ-साथ मंगल ग्रह की शांति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका व्रत रखने से कर्ज, शत्रु बाधा, भूमि विवाद और खून से जुड़ी किसी समस्या से राहत मिलती है. शिव पुराण के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति की मन की इच्छा पूरी नहीं हो रही है, तो उस व्यक्ति को यह व्रत जरूर करना चाहिए. इस व्रत को करने से सभी की मन की इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और साथ ही साथ जीवन की तमाम कष्टों और समस्याओं से मुक्ति मिलती है.

जया पार्वती व्रत का महत्व

जया पार्वती व्रत आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से शुरू हो जाता है और यह कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि तक चलता है. इस व्रत को गुजरात और पश्चिम भारत के लोग मुख्य रूप से मनाते हैं. इस व्रत को अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए करती हैं. एक मान्यता यह भी है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए मां पार्वती ने इस व्रत को किया था.

एक मान्यता ये भी

एक मान्यता यह भी है कि इस दिन बालू का हाथी बनाकर उस पर पांच तरह के फल, पांच तरह के फूल और पांच प्रसाद चढ़ाने से मां पार्वती खुश होती हैं और अच्छे वर का आशीर्वाद देती हैं. इस व्रत की विधि हरतालिका तीज, मंगला गौरी व्रत और गणगौर व्रत जैसी ही की जाती है.

व्रत करने का नियम

इस व्रत वाले दिन उपासक सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें फिर साफ या नए कपड़ पहनें. इसके बाद जहां पूजा करना है वहां गंगाजल से उस जगह को शुद्ध करें. लाल कपड़ा को एक चौकी पर बिछाकर उसपर पूजन सामग्री रखें. फिर उस चौकी पर मां पार्वती और पार्वती की मूर्ती की स्थापना कर पूजा करें. इस पूजा में विशष रूप से नारियल फल चढ़ाना चाहिए. इस दिन पूजा वाले स्थान पर जया पार्वती व्रत की कथा कहना चाहिए और उसके बाद आरती करनी चाहिए. पूजाखत्म होने के उसके अगले दिन रेत वाले हाथी को किसी नदी या तालाब में विसर्जित करना चाहिए.

इस व्रत वाले दिन उपासक सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें, फिर साफ या नए कपड़े पहनें. इसके बाद जहां पूजा करनी है, वहां गंगाजल से उस जगह को शुद्ध करें. लाल कपड़े को एक चौकी पर बिछाकर उस पर पूजन सामग्री रख लें फिर उस चौकी पर मां पार्वती और भगवान शिव की मूर्ति की स्थापना कर पूजा करें. इस पूजा में विशेष रूप से नारियल फल चढ़ाना चाहिए. इस दिन पूजा वाले स्थान पर जया पार्वती व्रत की कथा कहनी चाहिए और उसके बाद आरती करनी चाहिए. पूजा खत्म होने के बाद अगले दिन रेत वाले हाथी को किसी नदी या तालाब में विसर्जित करना चाहिए.



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