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Mahadev का एक ऐसा मंदिर जहां बिना सागर की इजाजत के नहीं कर सकते हैं दर्शन, अद्भुत है कहानी

Mahadev का एक अद्भुत संसार गुजरात (Gujarat) के वडोदरा (Vadodara) के पास अरब सागर (Arabian Sea) में स्थित है.

महादेव (Mahadev) का एक अद्भुत संसार गुजरात के वडोदरा के पास अरब सागर (Arabian Sea) में स्थित है. गुजरात (Gujarat) के भरूच (Bharuch) जिले में स्थित यह मंदिर समुद्र की तेज लहरों में अपने आप गायब हो जाता है और कुछ देर बाद खुद बाहर आ जाता है. इसका नाम स्तंभेश्वर महादेव मंदिर है. इसमें चार फुट ऊंचा और दो फुट घेरे वाला शिवलिंग स्थापित है. इस मंदिर में स्थित शिवलिंग को देखकर आप मंत्रमुग्ध हो जाएंगे.

क्या है मंदिर की मान्यता ?

इस मंदिर (Temple) के बारे में मान्यता है कि यहां महादेव का जलाभिषेक करने के लिए सागर उनके चरण स्पर्श कर अनुमति मांगते हैं. जहां सागर महादेव को अर्घ्य देने के लिए शाम को स्वयं शिव के द्वार पर पहुंचते हैं. यह मंदिर पूरे दिन में दो बार जलमग्न हो जाता है और तब मंदिर के शिखर पर फहरा रहे पताका के अलावा कुछ भी नजर नहीं आता और तब किसी को महादेव के दर्शन की अनुमति नहीं मिलती है.

पुराणों में क्या है मान्यता ?

इस मंदिर को पुराणों के अनुसार, सतयुग का बताया जाता है. इस मंदिर का वर्णन स्कंद पुराण में भी है. वहीं, शिव पुराण के रुद्र संहिता में भी इस मंदिर का वर्णन मिलता है. स्कंद पुराण के अनुसार इस मंदिर में स्थित शिवलिंग महादेव के साथ से ही है, मतलब बात युगों पुरानी है. इसको लेकर मान्यता है कि इस मंदिर को भगवान कार्तिकेय ने स्थापित किया था और यह मुनियों की तपस्थली है.

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-भारत एक्सप्रेस

 



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