India Road to 2036 Olympics: हाल ही में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में राष्ट्रमंडल खेलों (CWG) का समापन हुआ. इस बीच ज्ञात रहे ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य द्वारा हाथ खड़े करने के बाद ग्लासगो ने मजबूरी में और बहुत ही सीमित बजट व कम खेलों के साथ इस डूबते जहाज की कमान संभाली थी. जिसमें भारत के पसंदीदा खेल-कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी-को बाहर किए जाने के बावजूद भारतीय एथलीटों ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई.
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब दुनिया के अमीर देश भारी-भरकम खर्च और घाटे के डर से CWG की मेजबानी से पीछे हट रहे हैं, तब भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों को अहमदाबाद में होस्ट करने के लिए इतना उत्साह क्यों दिखा रहा है? आखिर क्या है भारत का मास्टरप्लान? आइए विस्तार से समझते हैं.
CWG 2030 भारत के लिए ‘मास्टरस्ट्रोक’ क्यों?(India Road to 2036 Olympics)
दुनिया के लिए भले ही राष्ट्रमंडल खेल एक ‘सफेद हाथी’ बन चुके हों, लेकिन भारत के लिए 2030 के CWG की मेजबानी एक रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है:
सस्ते दामों में वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर की टेस्टिंग: 2010 दिल्ली CWG के बजट और भ्रष्टाचार के दागों से सीख लेते हुए, भारत इस बार अहमदाबाद के अत्याधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और पहले से तैयार स्टेडियमों का इस्तेमाल करेगा. इससे लागत न्यूनतम होगी और भारत की मैनेजमेंट क्षमता दुनिया के सामने साबित होगी.
सॉफ्ट पावर और स्पोर्ट्स इकोनॉमी को बूस्ट: CWG केवल मेडल जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह भारत की टूरिज्म, जॉब क्रिएशन और डोमेस्टिक स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को कई गुना बढ़ाने का सबसे बड़ा मंच बनेगा.
ग्लोबल इमेज मेकओवर: 2010 की गलतियों को धोकर भारत दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह अब दुनिया के सबसे बड़े मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट्स को बिना किसी झंझट और रिकॉर्ड समय में आयोजित करने में सक्षम है.
क्या खुलेगा 2036 ओलंपिक का रास्ता?
बताते चलें अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) किसी भी देश को ओलंपिक की मेजबानी सौंपने से पहले उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता, लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट और सिक्योरिटी ग्रिड को परखती है. जिसके चलते भारत का असली लक्ष्य राष्ट्रमंडल खेलों से भी ऊपर 2036 का ग्रीष्मकालीन ओलंपिक होस्ट करना है.
अहमदाबाद का ‘सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव’ टेस्ट रन: अहमदाबाद को देश की स्पोर्ट्स कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है. CWG 2030 के जरिए भारत IOC को यह लाइव प्रूफ देगा कि अहमदाबाद लाखों दर्शकों, दुनिया भर के एथलीटों और ग्लोबल मीडिया को संभालने के लिए 100% तैयार है.
IOC का भरोसा जीतना: यदि भारत 2030 में एक सफल, ग्रीन और मॉडर्न CWG आयोजित कर लेता है, तो 2036 के ओलंपिक बिड (Bid) के लिए भारत का दावा इतना मजबूत हो जाएगा कि IOC के पास भारत को नजरअंदाज करने की कोई वजह नहीं बचेगी. यानी 2030 का CWG, 2036 ओलंपिक का ‘ड्रेस रिहर्सल’ है.
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नए स्पोर्ट्स लीडर के रूप में भारत का उदय
ऐतिहासिक रूप से वैश्विक खेलों और उनकी मेजबानी पर पश्चिमी देशों और अमीर यूरोपीय राष्ट्रों का दबदबा रहा है. लेकिन जैसे-जैसे पश्चिमी देश आर्थिक तंगी और भारी खर्च के कारण पीछे हट रहे हैं, भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की मजबूत आवाज बनकर उभर रहा है.
एशिया और अफ्रीका के देशों का नेतृत्व: भारत यह साबित (India Road to 2036 Olympics) कर रहा है कि विकासशील देश भी वैश्विक खेल आयोजनों का केंद्र बन सकते हैं.
खेलों की दिशा तय करने की ताकत: जब भारत मेजबान होगा, तो वह अपनी शर्तों पर उन पारंपरिक खेलों (जैसे कुश्ती, कबड्डी, शूटिंग) को वापस शामिल करवा सकता है, जिन्हें ग्लासगो जैसे पश्चिमी शहरों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इससे न केवल भारत का मेडल टेली बढ़ेगा, बल्कि एशियाई खेलों को वैश्विक पहचान भी मिलेगी.
स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी का नया युग: भारत अब सिर्फ एक ‘मेडल जीतने वाला देश’ नहीं रहा, बल्कि वह ग्लोबल स्पोर्ट्स इकोसिस्टम का ‘निर्माता और संरक्षक’ बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है.
-भारत एक्सप्रेस
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