IND vs SL Test: श्रीलंका के खिलाफ शनिवार (15 अगस्त) से शुरू हुए गॉल टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल ने आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका इंतजार उन्हें लंबे समय से था. श्रीलंका के खिलाफ पहली पारी में पडिक्कल ने अपने टेस्ट करियर का पहला शतक जड़ा और भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन यह सेंचुरी उनके लिए सिर्फ एक शानदार पारी नहीं थी, बल्कि करीब दो साल के इंतजार, मेहनत और खुद पर भरोसा बनाए रखने का नतीजा भी थी.
पडिक्कल लंबे समय बाद भारतीय टेस्ट टीम में लौटे थे. उन्होंने अपना पिछला टेस्ट नवंबर 2024 में खेला था. इसके बाद उन्हें टीम से बाहर रहना पड़ा, लेकिन इस दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाए. रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी और आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन के दम पर उन्होंने एक बार फिर टीम इंडिया में अपनी जगह बनाई और गॉल में मिले मौके को दोनों हाथों से लपक लिया.
गॉल की गर्मी में आसान नहीं थी बल्लेबाजी
गॉल की पिच पर बल्लेबाजी करना जितना चुनौतीपूर्ण था, उससे ज्यादा मुश्किल वहां की गर्मी और उमस से निपटना था. पडिक्कल ने बताया कि पारी के तीसरे सेशन तक पहुंचते-पहुंचते शरीर काफी थक चुका था. लगातार पसीना निकलने से फ्लूइड की कमी हो रही थी, लेकिन उन्होंने अपना ध्यान भटकने नहीं दिया.
पडिक्कल ने BCCI के एक वीडियो में बताया कि इस पारी में सबसे जरूरी चीज धैर्य और दृढ़ता थी. खासकर तीसरे सेशन में उन्हें काफी थकान महसूस हुई, लेकिन वह खुद को लगातार आगे बढ़ाते रहे. इस दौरान पडिक्कल ने केएल राहुल के साथ मिलकर 150 रनों की शानदार साझेदारी भी की. दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंका के स्पिनर्स प्रभात जयसूर्या और केशरा नुवांथा का संभलकर सामना किया और खराब गेंद मिलने पर उसका पूरा फायदा उठाया.
90 के बाद बढ़ी धड़कन
शतक के करीब पहुंचने के बाद पडिक्कल के लिए मानसिक चुनौती भी बढ़ गई थी. उन्होंने माना कि 90 रन पार करने के बाद वह थोड़ा नर्वस हो गए थे. टेस्ट क्रिकेट में पहला शतक सामने हो तो दबाव महसूस होना स्वाभाविक है, लेकिन पडिक्कल ने आखिरकार तीन अंकों का आंकड़ा छू ही लिया.
इससे पहले वार्म-अप मैच में भी उन्होंने श्रीलंका क्रिकेट XI के खिलाफ शतक लगाया था. यानी टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही उनका बल्ला अच्छी लय में था.
दो साल का इंतजार भूले नहीं हैं पडिक्कल
पडिक्कल के लिए इस शतक की सबसे खास बात उनका लंबा इंतजार है. उन्होंने कहा कि करीब दो साल तक टीम से बाहर रहकर दूसरे खिलाड़ियों को खेलते देखना आसान नहीं था. हालांकि, इसी दौर ने उन्हें अपने खेल की कमियों पर काम करने और खुद को बेहतर बनाने का मौका दिया.
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गॉल की यह पारी अब पडिक्कल के लिए सिर्फ पहला टेस्ट शतक नहीं, बल्कि उनकी वापसी की मजबूत कहानी भी बन गई है. नंबर-3 पर उन्होंने जिस तरह बल्लेबाजी की है, उससे आने वाले मुकाबलों में उनकी दावेदारी निश्चित तौर पर और मजबूत हुई है.
-भारत एक्सप्रेस
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