आपातकाल के 50 साल; सत्ता, संघर्ष और लोकतंत्र की अनकही दास्तान बयां करती प्रियंवद की नई किताब
आपातकाल के 50 साल बाद प्रियंवद की किताब ‘भारतीय लोकतंत्र का कोरस’ भारतीय लोकतंत्र की उस यात्रा को सामने रखती है, जिसमें आजादी के बाद के शुरुआती उत्साह से लेकर सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण तक की कहानी दर्ज है.
1975 में 25 June को Emergency हुई थी लागू, उस काले दिन के बारे में सोचकर आज भी कांप जाती है रूह
25 जून 1975 की रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसा दिन बन गया, जिसे आज भी लोग काले दिन के रूप में याद करते हैं. यह वही रात थी जब देश में आपातकाल लगाया गया. यह फैसला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का था. 25 जून की आधी रात को उन्होंने आपातकाल का आदेश जारी किया और 26 जून की सुबह इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई. इसके साथ ही भारत के नागरिकों के कई मौलिक अधिकार छीन लिए गए.
50 Years of Emergency: हर बोलती आवाज के खिलाफ था ‘आपातकाल’, भारत के इतिहास का सबसे काला दिन
देश में समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ आंदोलन तेज हो रहा था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा की लोकसभा सदस्यता को रद्द कर दिया था, जिससे उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गई.





