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75th year celebration

लेखक विचारक नहीं हो सकता. अगर वह विचारक हो गया तो दूसरों की न सुनेगा, न कहेगा, वह अपनी ही कहेगा. लेखक जैसा होता है, उसका कुछ अक्स उसके पात्रों में दिख ही जाता है.