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Ajmer Sharif Dargah

अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह को लेकर दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

अजमेर शरीफ दरगाह के दीवान के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने देश की साझा संस्कृति, गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं.

कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में राजस्थान हाई कोर्ट से कहा है कि वह पीड़ित द्वारा दायर अपीलों पर देरी को नजरअंदाज करते हुए मामले को गुण-दोष के आधार पर फैसला करने को कहा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने अजमेर शरीफ दरगाह के सीएजी ऑडिट पर फिलहाल रोक लगाई है. अदालत ने कहा कि सीएजी अधिनियम की धारा 20 की आवश्यक शर्तें पूरी नहीं हुई हैं, जिससे पहले राष्ट्रपति की मंजूरी और आपत्ति का अवसर अनिवार्य है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने सीएजी को अजमेर शरीफ दरगाह के ऑडिट पर रोक लगाने का निर्देश दिया, क्योंकि दरगाह को आपत्ति जताने का अवसर नहीं मिला. अगली सुनवाई 7 मई को होगी.​

हरियाणा के सोनीपत में सोमवार को आयोजित संत सम्मान सम्मेलन में पहलवान और भाजपा नेता योगेश्वर दत्त भी शामिल हुए और संतों का आशीर्वाद लिया. उन्होंने "कानून के दायरे में" अजमेर शरीफ दरगाह के सर्वे का समर्थन किया.

पीएम मोदी इस्लाम धर्म का सम्मान करते हुए हर साल अजमेर दरगाह शरीफ पर चादर भेजते हैं. इस साल 10वीं बार पीएम मोदी की चादर चढ़ाई जाएगी.

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को 13वीं शताब्दी की शुरूआत में भारत में सूफी रहस्यवाद के चिश्ती आदेश की स्थापना के लिए भी जाना जाता है. वह पहले संत थे जिन्होंने प्रार्थनाओं में संगीत और भजनों का प्रयोग शामिल किया.