बंगाल के अकाल के बीच कैसी थी दुर्गा पूजा? कहीं भोग की थाली सजी, तो कहीं एक मुट्ठी चावल के लिए तरसे लोग
1943 के बंगाल अकाल में लाखों लोगों ने भूख और कुपोषण के कारण अपनी जान गंवाई, लेकिन इसी दौरान दुर्गा पूजा की परंपरा भी जारी रही. कहीं पूजा की थालियों में तरह-तरह के पकवान सज रहे थे, तो कहीं लोग एक कटोरी खिचड़ी के लिए तरस रहे थे. ऐसे मुश्किल दौर में भोग सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भूख, सामाजिक असमानता और इंसानियत की कहानी भी बन गया.
गांधी की बात ठुकराई, जिन्ना का सपना तोड़ा; कौन थे गोपाल पाठा जिन्होंने बंगाल का भूगोल बदल दिया?
1946 में भारत विभाजन से पहले कलकत्ता में सांप्रदायिक तनाव चरम पर था. 16 अगस्त को मुस्लिम लीग द्वारा “डायरेक्ट एक्शन डे” के आह्वान के बाद शहर में भीषण हिंसा फैल गई, जिसे “ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स” के नाम से जाना जाता है.







