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चुनाव आयोग की निष्पक्षता और भूमिका को लेकर जारी बहस के बीच पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन एक बार फिर चर्चा में हैं. 1990 से 1996 तक अपने कार्यकाल में शेषन ने चुनावी नियमों के सख्त पालन, बूथ कैप्चरिंग पर नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर दिया था.

बेगूसराय के 'रॉबिन हुड' कामदेव सिंह: ग्वाले से माफिया सरगना और 'द ओरिजिनल गॉडफादर ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स' बने. इन्होंने कम्युनिस्टों के प्रभाव को चुनौती दी, बूथ कैप्चरिंग का पर्याय बने.

1957 में जब आम चुनाव हो रहे थे, तो इसी रचियाही में पोलिंग बूथ बनाया गया था. तब ये बूथ बेगूसराय विधानसभा के तहत आता था. अब रचियाही मटिहानी खुद विधानसभा है.