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सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बिना वारंट और लिखित कारण गिरफ्तारी अवैध है. तलाशी केवल संदेह या मनमानी संतुष्टि पर नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर होनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की अदालतों को जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर 3 से 6 महीने के भीतर निर्णय लेने का सख्त निर्देश दिया है. यह आदेश बॉम्बे हाई कोर्ट में वर्षों से लंबित अग्रिम जमानत याचिका के संदर्भ में दिया गया, जिसे 6 साल बाद खारिज किया गया था.

यह धारा मजिस्ट्रेट को जांच में सहायता के लिए किसी व्यक्ति को नमूना हस्ताक्षर देने के आदेश देने का अधिकार देता है. लेकिन उसमें यह भी कहा गया है कि ऐसा आदेश तब तक पारित नहीं किया जा सकता जब तक कि व्यक्ति को गिरफ्तार न कर लिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ मौजूदा लोकसभा चुनावों के बीच सीआरपीसी की धारा 144 लगाने के आदेश को चुनौती देने वाली एक्टिविस्ट अरुणा रॉय और निखिल डे द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी.