सत्ता, सवाल और नेतृत्व की परीक्षा
लोकतंत्र में नेतृत्व की असली पहचान बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि जनता के सवालों को सुनने और उनका धैर्यपूर्वक जवाब देने से होती है. सवाल पूछने वाला नागरिक या कार्यकर्ता नेता का विरोधी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती का आधार है.







