बंगाल के अकाल के बीच कैसी थी दुर्गा पूजा? कहीं भोग की थाली सजी, तो कहीं एक मुट्ठी चावल के लिए तरसे लोग
1943 के बंगाल अकाल में लाखों लोगों ने भूख और कुपोषण के कारण अपनी जान गंवाई, लेकिन इसी दौरान दुर्गा पूजा की परंपरा भी जारी रही. कहीं पूजा की थालियों में तरह-तरह के पकवान सज रहे थे, तो कहीं लोग एक कटोरी खिचड़ी के लिए तरस रहे थे. ऐसे मुश्किल दौर में भोग सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भूख, सामाजिक असमानता और इंसानियत की कहानी भी बन गया.
राज दरभंगा से लेकर हथुआ और डुमरांव तक… आखिर कैसे बिहार के ऐतिहासिक घरानों की पुश्तैनी दुर्गा पूजा खींच लाती है लोगों को अपनी जड़ों की ओर?
बिहार में दुर्गा पूजा सिर्फ भव्य पंडालों और उत्सव का नाम नहीं है. पुराने जमींदार घरानों के लिए यह अपनी पुश्तैनी जड़ों, कुलदेवी और सदियों पुरानी परंपराओं से दोबारा जुड़ने का मौका भी है.







