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GCC

भारत की टेक्नोलॉजी यात्रा चरखे और स्वदेशी आंदोलन से शुरू होकर आज सॉफ्टवेयर, UPI, अंतरिक्ष, AI और सेमीकंडक्टर तक पहुंच चुकी है.

Asia Largest GCC: ब्रुकफील्ड महाराष्ट्र के पवई में एशिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर (GCC) बना रहा है. 2 मिलियन स्क्वायर फीट में फैले इस प्रोजेक्ट में 1 बिलियन डॉलर का निवेश होगा और 45,000 से ज्यादा रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की 85 प्रतिशत कंपनियां अगले दो वर्षों में अपने ऑफिस पोर्टफोलियो को बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं, जो कि बीते वर्ष 2024 में 73 प्रतिशत थी.

भारत को आज ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) का हब माना जाता है. लंबे समय तक इसे सिर्फ सस्ती मज़दूरी, अंग्रेज़ी भाषा पर पकड़ और तकनीकी कौशल की वजह से जोड़ा जाता रहा.

ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के लिए भारत दुनियाभर की कंपनियों की पसंद बनकर उभर रहा है. विश्व के करीब 53 प्रतिशत या 1,700 के आसपास जीसीसी (GCC) देश में मौजूद हैं.

वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में अभूतपूर्व गति देखी जा रही है. ऑफिस स्पेस सॉल्यूशंस (Awfis Space Solutions) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अमित रमानी ने मीडिया से को-वर्किंग स्पेस में मजबूत वृद्धि और ऑफिस के प्रदर्शन के बारे में बात की है.

जीसीसी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में भारत की स्थिति ऑफिस स्पेस अब्सॉर्प्शन के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है. देश के स्किल्ड टैलेंट पूल और परिचालन लागतों के लाभ से आकर्षित होते हुए प्रमुख बहुराष्ट्रीय निगम रणनीतिक रूप से अपनी परिचालन उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं.

आने वाले वर्षों में नियो बैंक के बाजार में शानदार वृद्धि होने की उम्मीद है. पीडब्ल्यूसी की एक लेटेस्ट रिपोर्ट के अनुसार, नियो-बैंकिंग बाजार का मूल्य 2026 तक 395 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2018 में मात्र 19 अरब डॉलर था.

बेंगलुरू ने कुल GCC लीजिंग वॉल्यूम का 42 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जिसमें 2024 में 100 लीज ट्रांजैक्शन के साथ कुल 9.3 MSF ऑफिस स्पेस था, जो सभी शहरों में सबसे अधिक है. बेंगलुरू के बाद चेन्नई में 89 डील हुईं. दोनों शहरों में 50,000 वर्ग फुट से कम की श्रेणी में सबसे अधिक लीज देखी गईं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि "भारत के जीसीसी न केवल संख्या में बढ़ रहे हैं, बल्कि इनके रणनीतिक महत्व भी बढ़ रहे हैं. पिछले 5 वर्षों में इनमें से आधे से अधिक केंद्र पारंपरिक सेवा से आगे बढ़कर पोर्टफोलियो और परिवर्तन केंद्रों के रूप में काम कर रहे हैं.