जानिए आखिर कौन थे भारतेंदु हरिश्चंद्र, जिनकी रचनाएं आज भी हैं प्रासंगिक?
भारतेंदु हरिश्चंद्र हिंदी साहित्य के उन साहित्यकारों में शामिल हैं, जिन्होंने साहित्य को समाज और देश की चिंताओं से जोड़ा है. 9 सितंबर 1850 को काशी में जन्मे भारतेंदु ने नाटक, कविता, पत्रकारिता और निबंध के माध्यम से अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं को आवाज दी.
विनोद कुमार शुक्ल: सादगी के शब्दों में जीवन का जादू
प्रख्यात कवि, उपन्यासकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया. छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में जन्मे शुक्ल हिंदी साहित्य में सादगी और दार्शनिक गहराई का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करते थे.
कवि, नाटककार, पत्रकार और संपादक…ऐसा रहा सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का अनूठा सफर
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हिंदी साहित्य के बहुआयामी लेखक थे, जिनकी रचनाएँ कविता, नाटक, व्यंग्य और बाल साहित्य में श्रेष्ठता की मिसाल हैं. उनका योगदान नई कविता आंदोलन और बाल साहित्य में आज भी याद किया जाता है.
हिंदी साहित्य के छायावादी युग की प्रमुख कवयित्री थीं महादेवी वर्मा, लोग उन्हें कहते थे- आधुनिक युग की मीरा
आज महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि है. उन्होंने अपनी मुख्य रचनाओं और लेखन में भारतीय नारी की पीड़ा, उनकी इच्छाएं और संघर्षों को अपनी कविताओं में प्रस्तुत किया था. वह एक ऐसी कवयित्री थीं, जिन्हें साहित्य प्रेमी आज भी नमन करते हैं.
हिंदी साहित्य के एक ऐसे कवि, जिन्होंने अद्भुत लेखनी से शेक्सपीयर और मिल्टन को छोड़ दिया था पीछे; जानें कितनी भाषाओं का था ज्ञान?
सीमाओं और जातियों के बंधनों से दूर उन्होंने ऐसी कृतियां गढ़ी, जिनकी आज भी खूब प्रशंसा होती है.





