चंदर-सुधा के अमर प्रेम के पीछे छिपा है एक और गहरा सच! ‘गुनाहों का देवता’ के बाद क्यों ज़रूर पढ़ी जानी चाहिए ‘रेत की मछली’?
मेरे द्वारा की गई साहित्यिक समीक्षा: 'गुनाहों का देवता' और 'रेत की मछली' उपन्यासों के झरोखे से मानवीय संबंधों, निश्चल प्रेम और स्त्री की मौन वेदना का एक मार्मिक विश्लेषण.
हिंदी साहित्य के छायावादी युग की प्रमुख कवयित्री थीं महादेवी वर्मा, लोग उन्हें कहते थे- आधुनिक युग की मीरा
आज महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि है. उन्होंने अपनी मुख्य रचनाओं और लेखन में भारतीय नारी की पीड़ा, उनकी इच्छाएं और संघर्षों को अपनी कविताओं में प्रस्तुत किया था. वह एक ऐसी कवयित्री थीं, जिन्हें साहित्य प्रेमी आज भी नमन करते हैं.





