वैश्विक विकास के लिए भारत के विजन के मूल में शांति, सस्टेनिबिलिटी और पारस्परिक सहयोग
भारतीय उपमहाद्वीप में बदलते भूराजनैतिक परिदृश्य के बीच भारत का वैश्विक विकास दृष्टिकोण सततता, पारस्परिक सहयोग और महासागर आधारित समृद्धि पर आधारित है. प्रो. चिंतामणि महापात्रा ने महासागर की भूमिका और भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ दर्शन के महत्व पर प्रकाश डाला.





