‘इतिहास सिर्फ पढ़ा नहीं जाएगा, महसूस भी होगा…!’ ‘कला संकुल’ में गूंजी ‘आजादी के सिंदूरी रंग’ की हुंकार
दिल्ली के कला संकुल में संस्कार भारती की मासिक मंचीय कला संगोष्ठी में नाटक ‘आजादी के सिंदूरी रंग’ पर परिचर्चा और जीवंत पाठ हुआ. रंगकर्मियों ने कला को राष्ट्रीय चेतना और युवा पीढ़ी को इतिहास का सशक्त माध्यम बताया.
नाट्य लेखन में सामाजिक चुनौतियों पर विमर्श: संस्कार भारती की मासिक गोष्ठी में गूंजे विचार और सुर
Sanskar Bharti: संस्कार भारती की मासिक गोष्ठी में संगीत और नाट्य लेखन पर गहन विमर्श हुआ. विद्वानों ने नाट्य साहित्य की सामाजिक भूमिका, चुनौतियाँ और संभावनाओं पर अपने विचार रखे.





