Bharat Express DD Free Dish

नाट्य लेखन में सामाजिक चुनौतियों पर विमर्श: संस्कार भारती की मासिक गोष्ठी में गूंजे विचार और सुर

Sanskar Bharti: संस्कार भारती की मासिक गोष्ठी में संगीत और नाट्य लेखन पर गहन विमर्श हुआ. विद्वानों ने नाट्य साहित्य की सामाजिक भूमिका, चुनौतियाँ और संभावनाओं पर अपने विचार रखे.

Sanskar Bharti

नई दिल्ली, 31 अगस्त: संस्कार भारती के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित मासिक गोष्ठी एक बार फिर कला, साहित्य और संस्कृति के विविध आयामों से ओतप्रोत रही. इस गोष्ठी में संगीत और नाट्य साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया.

सुरमयी प्रस्तुति से हुआ कार्यक्रम का शुभारम्भ

कार्यक्रम का शुभारम्भ युवा गायिका सुहानी कौशिक और वंशी वादक सुमित शर्मा की सुरमयी प्रस्तुति से हुआ. उनके मधुर स्वरों ने सभा को एक अलौकिक रस लोक में प्रवेश कराया और वातावरण को भक्तिभाव एवं कलात्मकता से भर दिया.

गोष्ठी का मुख्य सत्र प्रारम्भ हुआ

इसके पश्चात् गोष्ठी का मुख्य सत्र प्रारम्भ हुआ, जिसमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रो. रजनीश कुमार मिश्र और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चंदन चौबे ने “सामाजिक दृष्टि से नाट्य लेखन: संभावनाएँ और चुनौतियाँ” विषय पर अपना विचारपूर्ण वक्तव्य रखा. उन्होंने नाट्य साहित्य की परंपरा, उसकी सामाजिक उपयोगिता, और बदलते समय में उसके नए आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला. प्रो. रजनीश ने अपने सम्बोधन में कहा कि लोक के साथ तनमय हुए बिना कोई कला सार्थक नहीं होती है.समाज आज भी अपनी वास्तविकता को दर्शाने वाले लेखन को स्वीकार करने में असहज हो जाता है.

प्रदर्शनकारी कलाओं के माध्यम से लोगों के बीच संस्कृति को पहुंचाया गया

वहीं आचार्य चंदन चौबे ने बताया कि समाज में भक्ति को प्रदर्शनकारी कलाओं ने सर्वाधिक विस्तार देने का काम किया है. प्रदर्शनकारी कलाओं के माध्यम से लोगों के बीच संस्कृति को पहुंचाया गया है. उन्होंने बताया कि नाटक लिखना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है क्योंकि किसी नाटककार का लेखन ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पात्र के चरित्र निर्माण का प्रकल्प है. दोनों के व्याख्यान ने उपस्थित श्रोताओं को गहन चिंतन और संवाद के लिए प्रेरित किया. पूरे सत्र का कुशल संचालन दिल्ली प्रान्त के मंचीय कला संयोजक राज उपाध्याय ने किया.

ये भी पढ़ें: ‘जीवन की हर जरूरत में सब स्वदेशी हो’, ‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने दिया ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

समाज और संस्कृति से जुड़े बौद्धिक विमर्श का रही केंद्र

संस्कार भारती की यह मासिक गोष्ठी न केवल कलात्मक प्रस्तुतियों का मंच बनी अपितु समाज और संस्कृति से जुड़े बौद्धिक विमर्श का केंद्र भी रही. यह आयोजन एक बार फिर इस तथ्य को पुष्ट करता है कि कला, साहित्य और समाज तीनों मिलकर ही राष्ट्र के सांस्कृतिक व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं.

कार्यक्रम में ये कलाकार रहे शामिल

कार्यक्रम में मोहन वीणा के प्रसिद्ध कलाकार श्री अजय कुमार,संस्कार भारती दिल्ली प्रान्त के मंत्री डॉ. प्रशांत उपाध्याय सहित दिल्ली विश्व विद्यालय के अनेक विद्धवान प्रोफेसर,शोधार्थी छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. संगोष्ठी को सफल बनाने में भारती डांग,कार्यक्रम संयोजक श्री कुलदीप शर्मा,संगोष्ठी संयोजिका श्रुति सिन्हा, गरिमा रानी,स्नेहा मुखर्जी,श्री हर्षित गोयल,श्री शौरभ त्रिपाठी,विजेंदर कुमार,सुशांक,बृजेश सहित मंच का संचालन संगोष्ठी के सह संयोजक श्री विश्वदीप की सराहनीय भूमिका रही.

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read