महर्षि अरविंद घोष : क्रांति से योग तक का अमर सफर
आज जब हम 5 दिसंबर की तारीख देखते हैं, मन अपने आप उस महान ऋषि की ओर उठता है जिन्होंने भारत की स्वाधीनता-साधना को भी उतनी ही गहराई से जिया जितनी गहराई से उन्होंने मानव-चेतना के अन्तर्जगत को खोजा.

आज जब हम 5 दिसंबर की तारीख देखते हैं, मन अपने आप उस महान ऋषि की ओर उठता है जिन्होंने भारत की स्वाधीनता-साधना को भी उतनी ही गहराई से जिया जितनी गहराई से उन्होंने मानव-चेतना के अन्तर्जगत को खोजा.