विज्ञान का मल्टीवर्स और सनातन का ब्रह्मांड, क्या अरबों साल पहले ही हो चुकी थी समानांतर दुनिया की परिकल्पना?
सनातन धर्म में ब्रह्मांड की कल्पना केवल एक दुनिया या एक आकाश तक सीमित नहीं है. भागवत पुराण समेत हिंदू ग्रंथों में असंख्य ब्रह्मांडों, अलग-अलग लोकों और भौतिक दुनिया से परे आध्यात्मिक आयामों का उल्लेख मिलता है.
क्या ऐसा हो सकता है कि जो इतिहास हमने पढ़ा है वह अनंत ब्रह्मांड के किसी कोने में मौजूद ग्रह पर वर्तमान में घट रहा हो?
ऐसा हो सकता है कि अनंत ब्रह्मांड में मौजूद असंख्य आकाशगंगाओं में हमारी धरती जैसे अरबों ग्रह मौजूद होंगे. इन आकाशगंगाओं में एक ऐसा ग्रह भी हो सकता है, जो बिल्कुल हमारी पृथ्वी जैसा हो और जहां यहां की तरह जीवन भी हो.





