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Muslim Personal Law

पीपुल्स अवेयरनेस फोरम के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जेड. के. फैजान ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यप्रणाली और उसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज की तारीख में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक निष्क्रिय और अप्रभावी संगठन बनकर रह गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत नाबालिग पत्नी से बने शारीरिक संबंध भी पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध माने जाएंगे.

सुप्रीम कोर्ट तलाक-ए-हसन की संवैधानिकता पर 27 अक्टूबर को अंतिम सुनवाई करेगा. कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या 2026 जैसे आधुनिक दौर में महिलाओं की गरिमा से खिलवाड़ करने वाली प्रथा को जारी रहने दिया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं में बहुविवाह प्रथा को समाप्त करने और इसे दंडनीय अपराध घोषित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की जरूरत को समय की मांग बताया है. कोर्ट ने यह भी कहा कि कानूनों में स्पष्टता और एकरूपता से ही सामाजिक शांति और न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार के वक्फ उम्मीद पोर्टल के लॉन्च पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की. बोर्ड ने इसे अवैध और संविधान विरोधी बताया, जबकि वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है.

दिल्ली हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत न्यायेतर तलाक याचिकाओं पर पारिवारिक अदालतों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें तलाक नामा या अन्य समझौते की मूल प्रति अदालत में पेश करना जरूरी होगा.

याचिका केरल की सफिया पीएम नाम की एक महिला की ओर से दायर की गई है. सफिया ने याचिका में मांग की है कि मुस्लिम परिवार में जन्म लेने के बावजूद जो मुस्लिम पर्सनल लॉ का पालन नहीं करना चाहते हैं उनपर भारतीय उत्तराधिकार एक्ट 1925 लागू होना चाहिए.