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Space Technology

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी स्थित सेवा तीर्थ में भारत के 20 प्रमुख अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और संस्थापकों (फाउंडर्स) के साथ बातचीत की.

Space mission abort system: रॉकेट लॉन्च के दौरान किसी भी बड़ी तकनीकी खराबी से एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा के लिए स्पेस एजेंसियां 'अबॉर्ट सिस्टम' का इस्तेमाल करती हैं. कनाडाई एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन ने बताया कि यह सिस्टम लॉन्च के आखिरी पलों में कैप्सूल को रॉकेट से अलग कर सुरक्षित लैंडिंग कराता है.

वैज्ञानिक सैकड़ों हजारों किलोमीटर दूर मौजूद सैटेलाइट और चांद से आसानी से संपर्क कर लेते हैं, लेकिन धरती पर मोबाइल नेटवर्क कुछ मीटर में ही जवाब दे देता है. इसकी वजह तकनीक नहीं बल्कि पावर सोर्स है, क्योंकि सैटेलाइट कम्युनिकेशन में बेहद ज्यादा एनर्जी का इस्तेमाल होता है, जबकि मोबाइल फोन सीमित बैटरी पर चलता है. टनल, बेसमेंट और मोटी कंक्रीट दीवारें रेडियो सिग्नल को रोक देती हैं, जिससे नेटवर्क गायब हो जाता है. मोबाइल टावर की फ्रीक्वेंसी तेज होती है, लेकिन फोन को ज्यादा पावर इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं होती. यही कारण है कि स्पेस से कनेक्शन आसान है, लेकिन अंडरपास में नेटवर्क टूट जाता है.

अग्निकुल की नई फैसिलिटी डिज़ाइन, सिमुलेशन, प्रिंटिंग, पोस्ट-प्रोसेसिंग और फ़िनिशिंग को शामिल करते हुए एक इकोसिस्टम पेश करती है

भारत अंतरिक्ष में अपनी रक्षा ताकत को लगातार बढ़ा रहा है. जानिए कैसे NavIC, ASAT और स्पेस टेक्नोलॉजी आधुनिक युद्ध में भारत की चौथी शक्ति बन रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 'सुशासन के लिए अंतरिक्ष-प्रौद्योगिकी' सम्मेलन में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की 44 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई.

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि नए साल की पहली छमाही में इसरो ने लॉन्च के लिए आधा दर्जन बड़े मिशन तैयार किए गए, जिनमें गगनयान मानव मिशन के प्रस्तावना में एक महिला रोबोट को अंतरिक्ष में भेजना आदि शामिल है.

सरकार इस क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 60 हजार करोड़ रुपए का वार्षिक बजट आवंटित कर रही है."