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Tibetans

बयान में कहा गया, ‘‘वर्ष 1949 में जब चीन की लाल सेना ने तिब्बत पर हमला किया और 14वें दलाई लामा को धमकाने के लिए असुरक्षा की स्थिति पैदा की तब पूरे तिब्बत की स्थिति 10 मार्च 1959 को गंभीर श्रेणी में पहुंच गई.’’