भारत में थोक महंगाई दर अप्रैल में 13 महीनों के निचले स्तर पर रही, जानिए मोदी सरकार ने इसे कैसे किया काबू
थोक महंगाई दर में कमी की वजह खाद्य उत्पादों की कीमतों में कमी आना है. अप्रैल में खाद्य उत्पादों पर थोक महंगाई दर कम होकर 2.55 प्रतिशत रह गई है, जो कि मार्च में 4.66 प्रतिशत पर थी.
खुदरा मुद्रास्फीति छह साल के निचले स्तर पर, यह सरकार के प्रयासों का नतीजा है: वित्त मंत्रालय
वित्त मंत्रालय ने एक प्रेस बयान में कहा कि सरकार ने आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हुए मूल्य वृद्धि को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किया है. खुदरा मुद्रास्फीति वित्त वर्ष 2025 में छह साल के निचले स्तर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई.
मार्च में थोक मुद्रास्फीति चार महीने के निचले स्तर पर पहुंची
थोक मुद्रास्फीति, उत्पादक कीमतों का एक प्रमुख मापक है. यह मार्च में वर्ष-दर-वर्ष 2.05% बढ़ी, जबकि फरवरी में यह 2.38% थी.
थोक महंगाई दर में राहत, जनवरी में घटकर 2.31 प्रतिशत पर आई
खाद्य वस्तुओं में सब्जियों की कीमतों में गिरावट के कारण इस साल जनवरी में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति कम होकर 2.31 प्रतिशत पर पहुंच गई.
भारत की थोक मुद्रास्फीति सितंबर में 1.84 प्रतिशत रही
अगस्त की तुलना में सितंबर में खनिजों (1.83 प्रतिशत), गैर-खाद्य वस्तुओं (1.31 प्रतिशत) और खाद्य वस्तुओं (0.86 प्रतिशत) की कीमतों में वृद्धि हुई.





